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न गेहूं, न सोयाबीन... इस फल ने किसान को बना दिया लाखों का मालिक! जानें 15-20 लाख की कमाई का सीक्रेट!

साल 2019 में प्रगतिशील किसान भाऊसाहेब घुगे ने दापोली कृषि विद्यापीठ से बहाडोली किस्म के 400 जामुन के पौधे लाकर 2 एकड़ क्षेत्र में लगाए थे. इस बाग की देखभाल, खाद व्यवस्थापन, पानी नियोजन और जामुन की बिक्री की पूरी जिम्मेदारी युवा किसान दीपक पालवे संभाल रहे हैं.

Jalna Successful experiment Jalna Successful experiment

महाराष्ट्र के जालना जिले के बदनापुर तहसील के भराडखेडा गांव में फल बागवानी की एक सफल मिसाल देखने को मिल रही है. यहां युवा किसान दीपक पालवे की देखरेख में मात्र 2 एकड़ में तैयार की गई जामुन की बाग आज लाखों रुपये की आय का जरिया बन गई है. इस साल इस बाग से 15 से 20 लाख रुपये की कमाई होने की उम्मीद है. खास बात यह है कि पूरी बाग जैविक पद्धति से तैयार की गई है, जिससे जामुन की गुणवत्ता भी बेहतर मानी जा रही है. तो चलिए आपको बताते हैं पूरी कहानी क्या है.

साल 2019 में प्रगतिशील किसान भाऊसाहेब घुगे ने दापोली कृषि विद्यापीठ से बहाडोली किस्म के 400 जामुन के पौधे लाकर 2 एकड़ क्षेत्र में लगाए थे. इस बाग की देखभाल, खाद व्यवस्थापन, पानी नियोजन और जामुन की बिक्री की पूरी जिम्मेदारी युवा किसान दीपक पालवे संभाल रहे हैं. उन्होंने गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कर पूरी बाग को जैविक तरीके से विकसित किया है.

जैविक खेती के कारण जामुन की गुणवत्ता बेहतर
दीपक पालवे पिछले कुछ वर्षों से इस बाग की नियमित देखभाल कर रहे हैं. पेड़ों की कटाई-छंटाई, सिंचाई, खाद व्यवस्थापन, उत्पादन और बाजार तक बिक्री की पूरी व्यवस्था वही संभालते हैं. उनका कहना है कि जैविक खेती के कारण जामुन का आकार, स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है.

फल बागवानी के लिए पानी सबसे बड़ी आवश्यकता होती है. इसे ध्यान में रखते हुए राजेवाड़ी तालाब के पास कुआं खोदकर सिंचाई की व्यवस्था की गई. इसके अलावा एक एकड़ का खेत तालाब बनाकर पानी का संग्रह भी किया जाता है. शुरुआती वर्षों में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों को पानी दिया गया.

होती है अच्छी पैदावार
जामुन के पौधे छोटे होने के कारण शुरुआती तीन वर्षों तक इसी बाग में गेहूं, सोयाबीन और प्याज जैसी अंतरवर्ती फसलें भी ली गईं. लेकिन पेड़ों की बढ़त होने के बाद चौथे वर्ष से अंतरवर्ती खेती बंद कर दी गई. इस वर्ष बाग का तीसरा उत्पादन सीजन है, जबकि इससे पहले दो बार अच्छी पैदावार मिल चुकी है.

पिछले वर्ष जामुन की पूरी बाग व्यापारी को उधड़ा पद्धति से 10 लाख रुपये में ठेके पर दी गई थी. इस वर्ष दीपक पालवे ने स्वयं जामुन की तुड़ाई, ग्रेडिंग और बिक्री करने का निर्णय लिया है. उन्हें उम्मीद है कि इस वर्ष उत्पादन और बाजार भाव दोनों अच्छे रहने से आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

पेड़ से 3 से 4 कैरेट जामुन का उत्पादन की संभावना
दीपक पालवे के अनुसार एक पेड़ से लगभग 3 से 4 कैरेट जामुन का उत्पादन होने की संभावना है. बहाडोली किस्म का एक जामुन 15 से 25 ग्राम तक वजन का होता है. बाजार में व्यापारियों से 130 से 150 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल रहा है. मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन लाभदायक माना जाता है, इसलिए इसकी मांग लगातार बनी रहती है.

प्रगतिशील किसान भाऊसाहेब घुगे के पास वर्तमान में केसर आम के लगभग 6 हजार पेड़ों का बाग भी है. इसके अलावा हाल ही में 3 एकड़ क्षेत्र में 600 नए जामुन के पौधे लगाए गए हैं, जो अभी दो वर्ष के हैं. इन पौधों से अगले दो वर्षों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. दीपक पालवे का मानना है कि यदि किसानों के पास सिंचाई की बेहतर व्यवस्था हो तो फल बागवानी आय बढ़ाने का एक प्रभावी विकल्प बन सकती है. जालना जिले के भराडखेडा गांव की यह जामुन की बाग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनती जा रही है.

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