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UNGA में बोलीं स्नेहा दुबे, भारत ने 20 करोड़ से अधिक महिलाओं को वित्त व्यवस्था की मुख्य धारा से जोड़ा

भारत में कोरोना महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया गया. इसके अलावा 40 करोड़ लोगों को आर्थिक राशि ट्रांसफर की गई. दुबे ने कहा कि वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन में तेजी लाई गई और 20 करोड़ महिलाओं को इससे जोड़ा गया.

स्नेहा दुबे ने कहा कि भारत ने 2 साल के अंदर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है (Photo: Social Media) स्नेहा दुबे ने कहा कि भारत ने 2 साल के अंदर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है (Photo: Social Media)
हाइलाइट्स
  • कोरोना के दौरान आर्थिक सशक्तिकरण की शुरूआत हुई

  • 20 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मुख्य धारा में लाए

  • 80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया

भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रथम महिला सचिव स्नेहा दुबे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में महिला सशक्तिकरण पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत ने दो साल के अंदर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है. स्नेहा दुबे ने कहा कि जब देश पिछले 2 साल से कोरोना जैसी भीषण महामारी से जूझ रहा था, उस समय हम पिछले 20 करोड़ से अधिक महिलाओं को वित्त व्यवस्था की मुख्य धारा में लाए. इस तरह आर्थिक सशक्तिकरण की शुरूआत हुई है.

स्नेहा दुबे ने बताया कि महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया गया. इसके अलावा 40 करोड़ लोगों को आर्थिक राशि ट्रांसफर की गई. दुबे ने कहा कि वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन में तेजी लाई गई और 20 करोड़ महिलाओं को इससे जोड़ा गया.

80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया गया

दुबे ने आगे कहा, डिजिटल तकनीकी और इंटरनेट की ताकत ने इस पहल को कई गुना बढ़ा दिया है. 80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन पहुंचाने और 40 करोड़ लोगों को वित्तीय मदद पहुंचाने का कार्यक्रम डिजिटल तकनीकी की मदद से संचालित किया गया. वित्तीय समावेश की रफ्तार बढ़ गई है.

आरोग्य सेतू एप ने किया प्रभावी काम

स्नेहा दुबे ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान हमारे आईटी प्लेटफार्म पर उतारे गए आरोग्य सेतु एप ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की दिशा में प्रभावी काम किया है. भारत में टीकाकरण अभियान का पूरा मैनेजमेंट कोविन एप ने किया है. ये एप लाखों लोगों को वैक्सीन की सुविधा प्रदान कर रहा है.

सामने आईं कई तकनीकी चुनौतियां

भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि प्रौद्योगिकियों के कारण कुछ अभूतपूर्व चुनौतियां भी आई हैं. इससे डिजिटल विभाजन का दबाव भी बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि हम इससे इनकार नहीं कर सकते कि निजता का हनन, गलत सूचनाओं का प्रसार और साइबर हमले आदि मानवाधिकारों के लिए खतरे की तरह हैं.