विमला ने बदली 'गुमा' की सूरत
विमला ने बदली 'गुमा' की सूरत
छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी केवल नक्सली हिंसा और दहशत के लिए जाना जाता था, आज विकास की नई गाथा लिख रहा है. इस बदलाव की सूत्रधार बनी हैं ग्राम गुमा की बेटी और गांव की पहली महिला सरपंच विमला नाग. विमला के हौसले ने न केवल नक्सलियों के डर को खत्म किया, बल्कि बुनियादी सुविधाओं से महरूम इस गांव को विकास की मुख्य धारा से जोड़ दिया है.
खौफ के साये में शुरू हुआ सफर
साल 2016 से पहले गुमा की स्थिति बदतर थी. धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां न सड़कें थीं और न ही शासन की योजनाओं की पहुंच. ऐसे कठिन समय में विमला नाग ने गांव की तस्वीर बदलने का फैसला किया. माता-पिता और ग्रामीणों के समर्थन से विमला ने चुनाव लड़ने की ठानी. नक्सलियों की दहशत के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सरपंच बनकर गांव की सेवा का बीड़ा उठाया.
दिखने लगा विकास
विमला के प्रयासों का नतीजा आज धरातल पर साफ नजर आता है. जिस गांव में कभी पगडंडियां भी सुरक्षित नहीं थीं, वहां आज पक्की सड़कों का जाल बिछ चुका है. बुनियादी सुविधाएं गांव के घर-घर में बिजली पहुंच चुकी है. आवास योजना ग्रामीणों के सिर पर पक्की छत देने के लिए 275 प्रधानमंत्री आवास का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है. स्वच्छता स्वच्छता के मानकों को पूरा करते हुए गुमा को ODF (खुले में शौच मुक्त) घोषित कर दिया गया है.
महिला सशक्तिकरण पर जोर
विमला नाग केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव पर भी काम कर रही हैं. गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों को सक्रिय किया गया है. ये समूह आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर गांव की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं.
सरपंच विमला नाग का कहना है कि अभी सफर शुरू हुआ है, मंजिल अभी बाकी है. उन्होंने अपनी आगामी प्राथमिकताओं को साझा करते हुए बताया, 'मेरा लक्ष्य गुमा को एक मॉडल गांव के रूप में पहचान दिलाना है. फिलहाल गांव में सिंचाई के लिए तालाब, आंतरिक सीसी रोड और पुलिया की सख्त जरूरत है. हम चाहते हैं कि लोग गुमा को उसके पिछड़ेपन के लिए नहीं, बल्कि एक 'विकासशील गांव' के नाम से जानें.'
रिपोर्टर: धर्मेन्द्र सिंह
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