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Vartika Tea Stall Believer Upsc Journey: पिता के पैरालिसिस के बाद संभाला परिवार, चाय बेचकर 3 बहनें कर रहीं UPSC की तैयारी, जानिए 'बिलीवर' स्टॉल की प्रेरक कहानी

पिता को पैरालिसिस अटैक आने के बाद ग्रेजुएट वर्तिका ने अपनी दो छोटी बहनों के साथ मिलकर 'बिलीवर' नाम से चाय का स्टॉल शुरू किया. परिवार का खर्च उठाने के साथ ही तीनों बहनें पढ़ाई भी कर रही हैं. IAS सृष्टि देशमुख से प्रेरित वर्तिका रोजाना 5-6 घंटे ऑनलाइन पढ़ाई कर UPSC क्रैक करने की तैयारी में जुटी हैं.

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वर्तिका चाय का स्टॉल पर सज रहा UPSC क्रेक करने का सपना वर्तिका चाय का स्टॉल पर सज रहा UPSC क्रेक करने का सपना

कहते है न कि संतान सपूत निकल जाते हैं तो माता-पिता का दुख दूर हो जाता है. वर्तिका ग्रेजुएशन कर चुकी हैं. पिता को पैरालिसिस अटैक आने के बाद घर की स्थिति संभालने की जिम्मेदारी उनके सामने आई. इसके बाद उन्होंने करीब तीन महीने पहले चाय का स्टॉल शुरू करने का फैसला किया. अब इसी काम के जरिए वह परिवार के खर्च में मदद कर रही हैं. इस काम में उनकी दोनों छोटी बहनें भी उनका साथ देती हैं. तीनों बहनें मिलकर स्टॉल संभालती हैं और साथ ही अपनी पढ़ाई को भी जारी रखे हुए हैं.

तीनों बहनों का सपना UPSC क्रैक करना
वर्तिका ग्रेजुएशन पूरी कर चुकी हैं और UPSC की तैयारी में जुटी हैं. वहीं उनकी दोनों छोटी बहनें फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर की छात्राएं हैं. दोनों का लक्ष्य भी UPSC परीक्षा पास करके आगे बढ़ना है. वर्तिका को जब स्टॉल से समय मिलता है तो वह घर जाकर ऑनलाइन पढ़ाई करती हैं. वह रोज करीब 5-6 घंटे UPSC की तैयारी के लिए निकाल पा रही हैं. सुबह भी पढ़ाई करने के बाद ही वह स्टॉल के लिए निकलती हैं.

कहती हैं- पढ़ाई के घंटे नहीं, क्वालिटी मायने रखती है
कम समय मिलने के बावजूद वर्तिका का मानना है कि वह क्वालिटी स्टडी कर रही हैं. उनके रोल मॉडल IAS अधिकारी सृष्टि देशमुख हैं. उनसे प्रेरणा लेकर वर्तिका ने IAS बनने का सपना देखा है और फिलहाल चाय के स्टॉल के साथ अपनी तैयारी को आगे बढ़ा रही हैं. वर्तिका ने चाय का स्टॉल शुरू किए अभी करीब तीन महीने ही हुए हैं. उनके मुताबिक फिलहाल इस काम से सिर्फ खर्च निकल पा रहा है, लेकिन इस दौरान उन्होंने बिजनेस की कई बारीकियां सीख ली हैं. उनके स्टॉल की एक खास पहचान उसका नाम भी है. स्टॉल का नाम 'बिलीवर' है, जिसका मतलब है खुद पर भरोसा.

पैसे न हों तो नहीं लेतीं फीस
वर्तिका और उनकी बहनों के इस स्टॉल से जुड़ी एक और बात खास है. अगर कोई बुजुर्ग, रिक्शावाला या ऐसा ग्राहक आता है जिसके पास पैसे नहीं हैं, तो बहनें उससे चाय के पैसे नहीं लेतीं. फिलहाल वर्तिका चाय का स्टॉल चलाने के साथ पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं. उनका IAS बनने का सपना पूरा होगा या नहीं, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन उनके लक्ष्य बड़े हैं और वह उन्हें पूरा करने की कोशिश में जुटी हैं. 
 

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