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Bicycle Uncle: साइकिल को माध्यम बनाकर चलाया अभियान, 10 हजार किमी यात्रा करके 5 लाख ग्रामीण को किया जागरूक

बरेली के संजीव जिंदल साइकिल को माध्यम बनाकर ग्रामीणों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं. संजीव ने अब तक 10 हजार किमी की यात्रा करके 5 लाख लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया है.

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हाइलाइट्स
  • 22 साल से कर रहे हैं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक

  • साइकिल पर की 10 हजार किमी की यात्रा

उत्तर प्रदेश में बरेली के रहने वाले संजीव जिंदल को लोग 'साइकिल अंकल' के नाम से जानते हैं. गांव-गांव जाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने वाले संजीव जिंदल अब तक 10 हजार किमी की यात्रा साइकिल से कर चुके हैं. अपनी साइकिल यात्रा के दौरान वह लोगों को जागरुक करते हैं. 

साइकिल पर सवार और हेलमेट लगाकर सड़कों पर नजर आने वाले बरेली के राजेंद्र नगर निवासी संजीव जिंदल ग्रामीण लोगों और किसानों को जागरूक करते हैं. संजीव कहते हैं साइकिल के जरिए वह अब तक लाखों लोगो को स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूक कर चुके हैं.  

22 साल से कर रहे हैं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक
वह कहते हैं कि मैं साइकिल की सवारी इसलिए करता हुं क्योंकि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए अच्छा है. साथ ही, लोग आज के दौर में साइकिल चलाना भूल चुके हैं. अब शहर और गांव में फर्क नहीं बचा है इसलिए शहरी और ग्रामीण, सभी क्षेत्रों में लोग बिमारियों का शिकार बन रहे हैं. 

संजीव बताते हैं कि वह पिछले 22 साल से घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य संबधित सेवाओं की जानकारी देते हैं. उन्होंने बताया कि पहले लोगों ने कोरोना का टीका नहीं लगवाया था लेकिन फिर उन्होंने लोगों को समझाया. 

किसानों को कर रहे हैं जागरुक 
संजीव जिंदल कहते है कि वह रोजाना घर से निकलते हैं और गांव-गांव जाकर किसानों को खेती के लिए जागरूक करते हैं. उन्हें सरकार की उनके लिए बनाई गई तमाम योजनाओं के बारे में बताते हैं. ज्यादातर किसानों को सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी ही नहीं है. 

साइकिल बाबा के साथ अब लोग जुड़ रहे हैं और उनकी टीम बढ़ने लगी है. जो भी उनके काम के बारे में सुनता है, उनके सफर में साथ चलने को तैयार हो जाता है. गौरव भी पिछले 2 साल से साइकिल बाबा की मुहिम में शामिल हैं. उनका कहना है लोगो को बहुत हद तक चीजों की जानकारी है ही नहीं और इस अभियान के कारण न जाने कितने लोग फ्री इलाज ले पा रहे हैं. 

संजीव जिंदल कहते है कि उनकी कोशिश अगले दो साल में 1,000 गांव को साइकिल यात्रा के जरिए कवर करने की है.