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कोविड-19 का असर उम्मीद से कहीं ज्यादा गंभीर, WHO रिपोर्ट में 22.1 मिलियन अतिरिक्त मौतों का खुलासा

महामारी का सबसे गंभीर असर 2021 में देखा गया, जब लगभग 10.4 मिलियन अतिरिक्त मौतें हुईं. इस दौरान वायरस के अधिक घातक वेरिएंट सामने आए. इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सुधरती दिखी और 2023 में अतिरिक्त मौतों की संख्या घटकर लगभग 3.3 मिलियन रह गई.

COVID 19 Pandemic COVID 19 Pandemic
हाइलाइट्स
  • आंकड़ों से तीन गुना ज्यादा निकला कोविड महामारी का असर

  • कोविड ने ली रिपोर्ट से तीन गुना ज्यादा जानें

COVID-19 महामारी के असर को लेकर एक नई वैश्विक रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2023 के बीच दुनिया भर में लगभग 22.1 मिलियन (2.21 करोड़) अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जो आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट की गई 7 मिलियन COVID-19 मौतों से तीन गुना से भी ज्यादा हैं. यह आंकड़ा बताता है कि कोरोना महामारी का असल प्रभाव कहीं ज्यादा था, जितना अब तक माना जाता रहा है.

2021 में सबसे ज्यादा असर, 1.04 करोड़ अतिरिक्त मौतें
रिपोर्ट के अनुसार, महामारी का सबसे गंभीर असर 2021 में देखा गया, जब लगभग 10.4 मिलियन अतिरिक्त मौतें हुईं. इस दौरान वायरस के अधिक घातक वेरिएंट सामने आए. इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सुधरती दिखी और 2023 में अतिरिक्त मौतों की संख्या घटकर लगभग 3.3 मिलियन रह गई.

पुरुषों में ज्यादा मृत्यु दर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में मृत्यु दर ज्यादा रही. पुरुषों में मृत्यु दर महिलाओं से लगभग 50% अधिक दर्ज की गई. इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ जोखिम तेजी से बढ़ा. 85 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में अतिरिक्त मृत्यु दर युवा वयस्कों की तुलना में 10 गुना अधिक पाई गई.

बुजुर्ग आबादी और देशों की संरचना ने बढ़ाया अंतर
कुछ देशों में ज्यादा मौतें इसलिए भी हुईं क्योंकि वहां बुजुर्ग लोगों की संख्या ज्यादा थी. जब उम्र और लिंग को ध्यान में रखकर आंकड़ों को देखा गया, तो पता चला कि असल में असर विकासशील और गरीब देशों में ज्यादा गंभीर रहा. इन जगहों पर अस्पताल, इलाज की सुविधा और सही समय पर डेटा मिलने की कमी भी बड़ी समस्या बनी, जिससे हालात को समझना और संभालना और मुश्किल हो गया.

निम्न आय वाले देशों में डेटा की बड़ी कमी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई देशों, खासकर गरीब और मध्यम आय वाले देशों में मौतों से जुड़ा पूरा और समय पर डेटा आसानी से उपलब्ध नहीं है. इस वजह से दुनिया भर में महामारी का असली असर समझने में काफी दिक्कतें आती हैं और कई जरूरी बातें छूट जाती हैं.