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Viral Post: क्या वाकई ऑफिस कैंटीन का खाना स्ट्रीट फूड से बेहतर है.. लिंक्डइन पोस्ट ने छेड़ी बहस

एक लिंक्डइन पोस्ट के अनुसार लोगों का ऑफिस का खाना खाने का आदत है. इस खाने में अक्सर सफेड चावल होते हैं, जिनमें कार्ब्स ज्यादा है, ज्यादा तेल वाली सब्जी और बहुत ज्यादा तले हुए स्नैक्स होते हैं. इस तरह का खाना खाने की अगर आदत पड़ जाए तो टाइप 2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन और फैटी लीवर जैसी बीमारी हो सकती है. लोग इस खाने को हाइजीन को देखते हुए स्ट्रीट फूड से बेहतर समझते हैं.

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कॉर्पोरेट ऑफिसों की चमकदार कैंटीन और पैकेज्ड खाने को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. फाउंडर डॉ. यशवंत कुमार के एक लिंक्डइन पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा छेड़ दी है. उन्होंने दावा किया कि कॉर्पोरेट कैंटीन में मिलने वाला रोजाना का खाना धीरे-धीरे कर्मचारियों को लाइफस्टाइल बीमारियों की ओर धकेल रहा है.

डॉ. यशावंत कुमार ने अपने पोस्ट में लिखा कि लोग अक्सर सड़क किनारे मिलने वाले खाने को गंदगी और खराब हाइजीन से जोड़कर देखते हैं. पानीपुरी, चाट या ठेले का खाना लोगों को तुरंत बीमार पड़ने का डर देता है, इसलिए वे उससे दूरी बना लेते हैं. वहीं दूसरी तरफ ऑफिस कैंटीन का खाना साफ-सुथरे माहौल, एसी और पैकेजिंग की वजह से सुरक्षित और हेल्दी मान लिया जाता है.

उन्होंने कहा कि असली खतरा उसी खाने में छिपा है जिसे लोग रोज बिना सोचे-समझे खाते हैं. उनके मुताबिक रिफाइंड चावल, ज्यादा तेल वाली सब्जियां, तले हुए स्नैक्स और पोषणहीन भोजन लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं.

धीरे-धीरे बढ़ रही हैं लाइफस्टाइल बीमारियां
पोस्ट में उन्होंने चेतावनी दी कि यह समस्या तुरंत नजर नहीं आती, बल्कि सालों तक धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है. उनका कहना है कि ऑफिस का अनहेल्दी खाना टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.

उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी काम के दबाव में जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं, नाश्ता छोड़ देते हैं और शाम को भूख लगने पर समोसे या फ्राइड स्नैक्स पर निर्भर हो जाते हैं. यह आदतें लगातार कई वर्षों तक जारी रहती हैं और शरीर में मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ाने लगती हैं.

'वेलनेस प्रोग्राम' पर भी उठाए सवाल
डॉ. कुमार ने कॉर्पोरेट वेलनेस प्रोग्राम्स पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कंपनियां मेडिटेशन सेशन, फिटनेस ऐप्स और हेल्थ वर्कशॉप्स पर खर्च करती हैं, लेकिन कर्मचारियों को मिलने वाले रोजाना के खाने की क्वालिटी पर ध्यान नहीं देतीं.

उनका मानना है कि अगर कंपनियां कैंटीन में पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराएं तो कर्मचारियों की सेहत बेहतर हो सकती है और हेल्थ इंश्योरेंस पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि हर ऑफिस कैंटीन में कम से कम एक हेल्दी, स्वादिष्ट और किफायती मील जरूर होना चाहिए.

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई सहमति
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. कई लोगों ने माना कि कॉर्पोरेट कल्चर में समय पर खाना न खाना, लंबे समय तक बैठकर काम करना और तनावभरी लाइफस्टाइल भी बड़ी समस्या है. यूजर्स ने कहा कि कंपनियों को सिर्फ प्रोडक्टिविटी नहीं बल्कि कर्मचारियों की खाने की आदतों और हेल्थ पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.