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Parenting Tips: बच्चों के हाथ से छीनना बंद करें फोन.. अपनाएं ये टिप्स, जीवन को मिलेगी नई दिशा.. हेल्थ भी होगी बेहतर

फोन का ज्यादा इस्तेमाल न केवल बच्चों की मानसिक सेहत के लिए खराब है, ब्लिक शारीरिक सेहत के लिए भी खराब है. ऐसे में उनकी फोन की लत को छुड़वाना काफी जरूरी हो जाता है. इसके लिए आप इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.

Child Phone Addiction Child Phone Addiction

आज के समय में स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ऑनलाइन पढ़ाई, गेम्स, वीडियो और सोशल मीडिया के कारण बच्चे घंटों मोबाइल स्क्रीन से जुड़े रहते हैं. धीरे-धीरे यह आदत मोबाइल एडिक्शन का रूप ले लेती है, जिसका असर बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ सकता है. कई पेरेंट्स इस बात से परेशान रहते हैं कि उनके बच्चे बिना मोबाइल के रह ही नहीं पाते. अगर आपके घर में भी यही समस्या है, तो कुछ आसान और समझदारी भरे कदम उठाकर आप बच्चों की इस आदत को कम कर सकते हैं.

बच्चों को रखें हमेंशा एक्टिव
बच्चों का ध्यान मोबाइल से हटाने का सबसे अच्छा तरीका है उन्हें फिजिकली एक्टिव बनाना. जब बच्चे आउटडोर एक्टिविटीज में बिजी रहते हैं, तो उनका स्क्रीन टाइम अपने आप कम होने लगता है. उन्हें पार्क में खेलने, साइकलिंग करने या दोस्तों के साथ स्पोर्ट्स खेलने के लिए कहें. इसके अलावा डांस, स्विमिंग या किसी स्पोर्ट्स क्लास में भी शामिल कराया जा सकता है. परिवार के साथ बैडमिंटन, क्रिकेट या अन्य गेम्स खेलना भी बच्चों को मोबाइल से दूर रखने में मदद करता है.

बच्चों को दें नए पैशन की दिशा
अगर बच्चे खाली समय में सिर्फ मोबाइल का सहारा लेते हैं, तो इसका मतलब है कि उन्हें किसी दूसरे काम में रुचि नहीं मिल रही. ऐसे में जरूरी है कि उनके इंटरेस्ट को पहचानकर उन्हें नई चीजें सीखने या उनके पैशन की तरफ उनके डायवर्ट करें. रीडिंग बुक्स, पेंटिंग, म्यूजिक, डांस या क्राफ्ट जैसी एक्टिविटीज में शामिल करें. जब बच्चे किसी क्रिएटिव काम में इंटरेस्ट लेने लगते हैं, तो उनका ध्यान धीरे-धीरे मोबाइल से हटने लगता है.

डांटने के बजाय प्यार से समझाएं
कई बार माता-पिता गुस्से में बच्चों से अचानक मोबाइल छीन लेते हैं, जिससे बच्चे चिड़चिड़े और नाराज हो जाते हैं. इसलिए जरूरी है कि उन्हें प्यार और समझदारी से समझाया जाए. मोबाइल बंद करने से पहले उन्हें कुछ मिनट पहले बंद करने की वजह बताएं, जिससे वह इस चीज़ के लिए तैयार हो सकें. इस तरीके से बच्चे धीरे-धीरे अपनी आदतों को कंट्रोल करना सीखते हैं और टाइम की वैल्यू भी समझने लगते हैं.