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Diarrhea Disease: गर्मी के मौसम में अस्पतालों में बढ़ रहे डायरिया के केस, डॉक्टर से जानें क्या है इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय, बच्चे-बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान  

Measures to Prevent Diarrhea: गर्मी का मौसम शुरू होते ही अस्पतालों में डायरिया के केस भी बढ़ने लगते हैं. ऐसे में डायरिया के लक्षणों और इससे बचाव के उपायों के बारे में जानना जरूरी है. डायरिया होने पर व्यक्ति को दिन में कई बार दस्त होते हैं. कमजोरी और थकान से व्यक्ति उठ तक नहीं पाता है.

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गर्मी का मौसम शुरू होते ही कई बीमारियां लोगों को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए तैयार हो जाती है. खासकर गर्मी के मौमस में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. गर्मी का मौसम शुरू होते ही अस्पतालों में डायरिया के केस भी बढ़ने लगते हैं. ऐसे में डायरिया के लक्षणों और इससे बचाव के उपायों के बारे में जानना जरूरी है.

डॉक्टर अजय राठौर ने बताया कि डायरिया होने पर व्यक्ति को दिन में कई बार दस्त होते हैं. इससे शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है.  डीहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान से व्यक्ति बिस्तर से उठ तक नहीं पाता है. अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत आ जाती है. बच्चे और बुजुर्गों को डायरिया से बचने की अधिक जरूरत होती है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार भारत में हर साल डायरिया से 1 से 6 साल की उम्र के 1 लाख 58 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हो जाती है.

आखिर क्या है डायरिया? 
डॉक्टर अजय राठौर ने बताया कि डायरिया (Diarrhea) एक ऐसी हेल्थ कंडीशन (Health Condition) है, जिसमें व्यक्ति को दिन कई बार दस्त होते हैं. जब व्यक्ति की आंते ठीक तरह से काम नहीं करती और बड़ी आंत से मल जल्दी बाहर निकल जाता है तब डायरिया की समस्या होती है. डायरिया मुख्यतः बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण, दूषित भोजन-पानी का सेवन, हाइजीन मेंटेन न करने या फूड पॉइजनिंग के कारण होता है. डायरिया में शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट तेजी से निकलते हैं. इससे कमजोरी, चक्कर और डीहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है. 

क्यों गर्मियों में डायरिया के बढ़ जाते हैं मामले?
आपको मालूम हो कि गर्मी के मौसम में तापमान अधिक होने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं. इससे खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं. खुले में रखा खाना, कटे फल, दूषित पानी और स्ट्रीट फूड संक्रमण का कारण बनते हैं. ऐसी चीजों को खाने से डायरिया आपको अपनी गिरफ्त में ले सकता है. 

क्या हैं डायरिया के लक्षण?
1. बार-बार लूज मोशन
2. पेट में मरोड़ और दर्द 
3. मतली-उल्टी 
4. शुरुआत में हल्का बुखार फिर तेज फीवर
5. कमजोरी और थकान
6. ज्यादा प्यास लगना
7. मल में खून या चिपचिपा पदार्थ
8. चक्कर आना, बेहोशी
9. पेशाब कम होना
10. आंखें और गाल धंसना
11. भूख कम लगना

डायरिया होने की किनको होती है ज्यादा रिस्क 
आपको मालूम हो कि डायरिया होने का ज्यादा रिस्क वैसे लोगों को होती है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हो, जिन्हें क्रॉनिक हेल्थ कंडीशन हो, जो डायबिटिक हों, जिन्हें लिवर कंडीशन है, जो बाहर का खाना खाते हैं, जो अधिक यात्रा करते हैं, शिशु और छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं. आपको मालूम हो बच्चों का शरीर जल्दी डीहाइड्रेट हो जाता है. बुजुर्गों में रिकवरी प्रोसेस स्लो हो जाता है. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में संक्रमण तेजी से फैलता है. बाहर का खाना खाने से फूड-बॉर्न इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है. खराब भोजन करने वालों को डायरिया होने का खतरा रहता है. शराब का अत्यधिक सेवन करने वालों को डायरिया बीमारी अपने गिरफ्त में ले सकती है. 

डायरिया होने पर तुरंत क्या करें?
डायरिया होने पर हर 10 से 15 मिनट में थोड़ा-थोड़ा फ्लूइड लें. ओआरएस का घोल पिएं. उबला हुआ पानी पिएं. नारियल पानी और छाछ का सेवन करें. मूंग की पतली खिचड़ी खाएं. डीहाइड्रेशन के संकेतों पर नजर बनाए रखें. स्थिति में सुधार न हो तो डॉक्टर को दिखाएं. डायरिया होने पर आप दही खा सकते हैं. केला खा सकते हैं. चावल का माड़ पी सकते हैं. जीरे का पानी पी सकते हैं. डायरिया के गिरफ्त में आने पर दूध और अन्य डेयरी उत्पाद का सेवन नहीं करना चाहिए. चाय और कॉफी भी नहीं पीनी चाहिए. शराब को हाथ तक नहीं लगाना चाहिए.  मसालेदार, तली हुई और फाइबर युक्त चीजों से परहेज करना चाहिए.

डायरिया से बचने के लिए क्या करें?
डायरिया से बचना है तो हमेशा उबला या फिल्टर्ड पानी पिएं. तरल पदार्थों को खूब सेवन करें. नारियल पानी और नींबू पानी पिएं. छाछ का सेवन करें. मौसमी फलों का सेवन करें. कटे फल या खुले में रखा खाना भूलकर भी न खाएं. खाना को सही तापमान पर स्टोर करें. बासी खाना कभी न खाएं. तेल और मसालेदार खाने से परहेज करें. बाहर यात्रा के दौरान ओआरएस और पानी की बोतल साथ रखें. हाइजीन मेंटेन रखें. साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. खाने से पहले और टॉयलेट के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं.