Packaged Food
Packaged Food
आज भारत सहित पूरी दुनिया में पैकेज फूड धड़ल्ले से बिक रहे हैं. लोग इन्हें खरीद कर बड़े ही चाव से खाते हैं लेकिन वे नहीं जान रहे हैं कि बाजार से खरीदी गई बिस्किट, चिप्स, सॉस, स्नैक, ड्रिंक, जैम या पैकेटबंद मीट की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए जिन प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल होता है, वे हमारी सेहत के लिए ‘धीमे जहर’ का काम कर रहे हैं. पैकेज फूड में छिपे प्रिजर्वेटिव्स से डायबिटीज और कैंसर होने का खतरा रहता है. हाल ही में हुई दो बड़ी स्टडीज ने यह डराने वाला खुलासा किया है. फ्रांस में किए गए इस शोध को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल और नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित किया गया है.
1 लाख से ज्यादा लोगों पर अध्ययन
शोधकर्ताओं ने साल 2009 से 2023 के बीच 1 लाख से ज्यादा फ्रांस के लोगों के खान-पान और हेल्थ डेटा का विश्लेषण किया. 14 साल तक चले इस न्यूट्रीनेट-सैंट अध्ययन में यह देखा गया कि प्रिजर्वेटिव्स का हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि पैकेट बंद फूड में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रिजर्वेटिव्स का हाई इनटेक टाइप-2 डायबिटीज और कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है. स्टडीज में यह पाया गया है कि सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम नाइट्रेट, सॉर्बेट्स, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट, एसीटेट्स और एसीटिक एसिड जैसे प्रिजर्वेटिव्स कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को कई गुना बढ़ाते हैं. रिसर्च में पाया गया कि हालांकि सभी प्रिजर्वेटिव्स कैंसर का कारण नहीं बनते, लेकिन कुछ विशेष रसायनों का ज्यादा सेवन खतरे को बढ़ा सकता है.
क्या होते हैं प्रिजर्वेटिव्स
प्रिजर्वेटिव्स वे केमिकल हैं, जो खाने को बैक्टीरिया और फफूंद से बचाकर महीनों तक ताजा रखते हैं. नमक और चीनी प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव्स हैं, लेकिन आज फूड इंडस्ट्री सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट और एसीटेट्स जैसे सिंथेटिक केमिकल्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है. यह सेहत के लिए नुकसानदेह है. अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ औद्योगिक रूप से तैयार किए गए ऐसे उत्पाद हैं, जिनमें आमतौर पर नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक होती है, जबकि आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है.
17 प्रिजर्वेटिव्स की जांच
इस रिसर्च के दौरान कुल 17 प्रिजर्वेटिव्स की जांच की गई, जिनमें से 12 का ज्यादा सेवन टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने वाला पाया गया. जिन लोगों ने कुल मिलाकर प्रिजर्वेटिव्स का अधिक इस्तेमाल किया, उनमें डायबिटीज होने का खतरा 47% तक ज्यादा था. पोटैशियम सॉर्बेट, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट, सोडियम नाइट्राइट, एसीटिक एसिड और सोडियम एसीटेट का इस्तेमाल करने वालों में इसका खतरा सबसे ज्यादा पाया गया. दूसरी कैल्शियम प्रोपियोनेट से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 42 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. कैल्शियम प्रोपियोनेट सफेद पाउडर होता है और इसका इस्तेमाल फफूंद और बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने के लिए किया जाता है. स्टडी की कोऑर्डिनेटर मैथिल्ड टौवियर ने कहा कि हालांकि इन नतीजों की पुष्टि के लिए अभी और शोध की जरूरत है, लेकिन यह पहले से मौजूद उन एक्सपेरिमेंट्स से मेल खाते हैं जो बताते हैं कि ये केमिकल्स हानिकारक हो सकते हैं.
कैंसर से जुड़ा खतरा
1. पोटैशियम सॉर्बेट का ज्यादा सेवन ओवरऑल कैंसर के खतरे को 14% और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को 26% तक बढ़ा सकता है.
2. सोडियम नाइट्राइट प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को 32% तक बढ़ा सकता है.
3. पोटैशियम नाइट्रेट से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 22% ज्यादा पाया गया.
4. सल्फाइट्स का संबंध ओवरऑल कैंसर के खतरे में 12% की बढ़ोतरी से पाया गया.
जताई चिंता
Nutrition and metabolic disorder researcher डॉ. सीमा गुलाटी ने कहा कि रिसर्च में ऐसे परिणामों के आने के बाद तत्काल जन जागरूकता को बढ़ावा मिलना चाहिए. डॉ. गुलाटी ने बताया कि कई प्रिजर्वेटिव दीर्घकालिक निम्न-स्तरीय सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और आंतों के माइक्रोबायोटा में गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं. फूड प्रिजर्वेटिव्स केमिकल्स के नुकसान को देखते हुए हेल्थ एक्सपर्ट ने चिंता जताई है. उन्होंने लोगों को कम से कम पैकेज फूड खाने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि लोगों को फ्रेश फूड ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए.