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चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत को आम बोलचाल में ‘चाय-सुट्टा’ कहा जाता है. कई लोग इसे दोस्तों के साथ समय बिताने, तनाव कम करने या कुछ देर आराम करने का तरीका मानते हैं. लेकिन यह आदत सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. चाय और सिगरेट का बार-बार साथ इस्तेमाल शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, खासकर सिगरेट में मौजूद निकोटीन और जहरीले रसायन लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं.
सिगरेट के धुएं में कई हानिकारक पदार्थ होते हैं. इसमें मौजूद निकोटीन शरीर को इसकी आदत डाल सकता है, जिससे व्यक्ति बार-बार सिगरेट पीने लगता है. लंबे समय तक धूम्रपान करने से फेफड़ों और दिल पर बुरा असर पड़ सकता है. इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ता है. लगातार धूम्रपान करने से शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत भी कमजोर हो सकती है.
गर्म चाय पीने से खाने की नली यानी गले से पेट तक जाने वाली नली की अंदरूनी परत पर असर पड़ सकता है. वहीं सिगरेट का धुआं और उसमें मौजूद जहरीले रसायन शरीर को अलग नुकसान पहुंचाते हैं. जब कोई व्यक्ति गर्म चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत बना लेता है, तो इन दोनों चीजों का बार-बार संपर्क शरीर के लिए नुकसान बढ़ा सकता है. एक्सपर्ट्स ने इस आदत को कैंसर, दिल की बीमारी और फेफड़ों से जुड़ी परेशानियों के बढ़ते खतरे से जोड़ा है.
कई लोग सिगरेट पीने के बाद तनाव कम या दिमाग ज्यादा एक्टिव महसूस करते हैं. निकोटीन कुछ समय के लिए ऐसा एहसास दे सकता है, लेकिन इसका असर खत्म होने के बाद दोबारा सिगरेट पीने की इच्छा हो सकती है. इसी तरह चाय में मौजूद कैफीन भी कुछ समय के लिए फोकस बढ़ा सकता है. इसलिए दोनों को साथ लेने की आदत धीरे-धीरे रोज की जरूरत जैसी लगने लग सकती है.
लंबे समय तक चाय-सिगरेट की आदत रखने से सिरदर्द, चक्कर और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. धूम्रपान से दिल और फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के साथ कई तरह के कैंसर का खतरा भी बढ़ता है. लगातार निकोटीन लेने का असर मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है.
अगर चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत बन गई है तो इसे छोड़ना आसान नहीं हो सकता, क्योंकि निकोटीन की आदत मजबूत होती है. शुरुआत में चाय पीते समय सिगरेट की जगह पानी पीना, थोड़ी देर टहलना, किसी दोस्त से बात करना या गहरी सांस लेना जैसे आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं. जरूरत महसूस होने पर डॉक्टर या धूम्रपान छोड़ने वाले एक्सपर्ट की मदद लेना भी बेहतर है.