
UTI
UTI
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इसी वजह से कुछ संक्रमणों का खतरा भी बढ़ जाता है. इन्हीं में से एक है UTI (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन), जो अगर समय पर न पहचाना जाए तो मां और बच्चे दोनों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक गर्भावस्था में UTI को हल्के में लेना सही नहीं है.
प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है UTI का खतरा?
डॉक्टर बताते हैं कि प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण यूरिनरी सिस्टम पर असर पड़ता है. इस दौरान गर्भाशय का आकार बढ़ने लगता है, जिससे ब्लैडर पर दबाव पड़ता है और यूरिन पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाता. यही स्थिति बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बना देती है और UTI होने का खतरा बढ़ जाता है.
UTI के सामान्य लक्षण क्या हैं?
डॉक्टरों के अनुसार UTI के लक्षण कई बार हल्के होते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. इसके प्रमुख लक्षणों में पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन, बदबूदार या धुंधला पेशाब और कभी-कभी हल्का बुखार शामिल हैं. प्रेग्नेंसी में कई बार UTI बिना किसी साफ लक्षण के भी हो सकता है, जिसे साइलेंट UTI कहा जाता है.
यूटीआई गंभीर होने पर संक्रमण किडनी तक फैल सकता है. ऐसे में बुखार, ठंड लगना और पीठ दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. 80 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाओं या डिमेंशिया जैसी स्थिति से जूझ रही महिलाओं में यूटीआई के कारण व्यवहार में बदलाव भी दिख सकते हैं, जैसे भ्रम की स्थिति या भूख कम लगना.

कितना खतरनाक हो सकता है UTI?
अगर UTI का समय पर इलाज न किया जाए तो यह किडनी तक पहुंच सकता है और गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है. प्रेग्नेंसी में यह स्थिति समय से पहले डिलीवरी, कम वजन वाले बच्चे और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती स्टेज में इलाज न मिलने पर इंफेक्शन बढ़ने का खतरा रहता है.
कारण क्या हैं?
प्रेग्नेंसी में UTI के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इनमें कम पानी पीना, यूरिन रोककर रखना, साफ-सफाई का ध्यान न रखना, और हार्मोनल बदलाव प्रमुख हैं. इसके अलावा जिन महिलाओं को पहले UTI हो चुका है, उनमें इसका खतरा ज्यादा रहता है.
इलाज कैसे किया जाता है?
डॉक्टरों के अनुसार UTI का इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है, लेकिन प्रेग्नेंसी में दवाओं का चयन बहुत सावधानी से किया जाता है. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए. साथ ही पर्याप्त पानी पीना, बार-बार पेशाब करना और साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है.
बचाव कैसे करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि UTI से बचने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं. दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, लंबे समय तक पेशाब न रोकना, कॉटन अंडरवियर पहनना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. क्रैनबेरी जूस जैसे प्राकृतिक उपाय भी कुछ हद तक मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें इलाज का विकल्प नहीं माना जाता.