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सिग्नेचर मैच नहीं हुई तो हो गया चेक बाउंस, डॉक्टर के पास गए तो पता लगा माइक्रोग्राफिया जैसी गंभीर बीमारी से थे ग्रस्त

हैदराबाद में एक व्यक्ति की ग्नेचर मैच नहीं हुई तो इससे उसका चेक बाउंस हो गया. हालांकि, जब वह डॉक्टर के पास गया तो पता लगा कि वह माइक्रोग्राफिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे.

सिग्नेचर सिग्नेचर
हाइलाइट्स
  • 6 महीने बाद हो गई थी बीमारी गंभीर

  • वेंकी को थी माइक्रोग्राफिया बीमारी  

हैदराबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति का चेक बाउंस हो गया. सबसे बड़ी बात कि उस चेक के बाउंस होने का कारण सिग्नेचर का मैच ना होना था. 48 साल के वेंकी नाम के व्यक्ति का चेक सिग्नेचर मिसमैच होने से बाउंस हो गया. जब बैंक कर्मचारियों से वेकी ने अपने सिग्नेचर को लेकर पूछताछ की तो उन्होंने वेंकी को उनका ओरिजिनल सिग्नेचर दिखाया, ये दोनों ही एक दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे.

उनके सिग्नेचर में अक्षरों की ऊंचाई कम हो गई थी और राइटिंग भी खराब हो गई थी. जब उन्होंने घर पर लिखने की कोशिश की, तो भी वहीं हुआ जो बैंक में हुआ था. लेकिन जब वेंकी न्यूरोलॉजिस्ट के पास गए तो पता चला कि ये एक बीमारी है. 

हाथों में थी कंपकंपी 

दरअसल, इस मामले का जिक्र हैदराबाद में अपोलो अस्पताल के कंसलटेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ सुधीर कुमार ने ट्विटर पर किया है. डॉ सुधीर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “जब वह मुझसे बात कर रहा था, तब मैंने उसके दाहिने हाथ को हल्का सा कांपते हुए देखा. इस बारे में वेंकी ने बताया  कि कंपकंपी हल्की है, लेकिन ये तब होता है जब वे चिंतित होते हैं. हालांकि, मुझे किसी बीमारी का आभास हो रहा था, जिसे मैं उनके साथ डिस्कस करना चाहता था.” 

6 महीने बाद हो गई थी बीमारी गंभीर

हालांकि, इसमें दो ऑप्शन थे हैंडराइटिंग सुधारने, प्रैक्टिस करने और थेरेपी का ऑप्शन या फिर डेफिनिटिव टेस्ट लेकर बीमारी का पता करना. इसमें वेंकी ने ट्रेनिंग का ऑप्शन चुना. एक महीने के बाद वेंकी ने डॉक्टर को बताया कि उनकी लेखनी में सुधार हो गया है. आगे डॉक्टर सुधीर लिखते हैं, "हालांकि, छह महीने बाद, वेंकी रिव्यू के लिए लौट आए. उसके दाहिने हाथ का कांपना गंभीर रूप से बढ़ गया था. इसके अलावा, उनका चलना धीमा हो गया था. ग्रुप में चलते समय वह स्पीड भी मैच नहीं कर पा रह थे.लेकिन इस बार वे इस बीमारी के बारे में असल में जानना चाहते थे.” 

वेंकी को थी माइक्रोग्राफिया बीमारी  

इस टेस्ट में सामने आया कि उन्हें पार्किंसंस रोग (पीडी) के कारण माइक्रोग्राफिया की बीमारी हो गई है. दरअसल, माइक्रोग्राफिया एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें लोगों की लेखनी असामान्य रूप से छोटी या नॉर्मल राइटिंग में हम जितना बड़े शब्द लिखते हैं उससे छोटा लिखना शुरू हो जाते हैं. ये एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है. ये अलग-अलग कारणों से हो सकता है जैसे पार्किंसंस रोग, एसेंशियल ट्रेमर्स, मल्टीपल स्केलेरोसिस या दूसरे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर. 

एक मीडिया वेबसाइट से बात करते हुए डॉ सुधीर ने बताया कि चूंकि हाथ कांपना केवल आवश्यक झटके और पार्किंसंस रोग में होता है, इसलिए मैंने एक और स्कैन के लिए कहा.  मैंने वेंकी को 18एफ-डीओपीए पीईटी स्कैन करवाने के लिए कहा.”

माइक्रोग्राफिया और पीडी क्या है?

पार्किंसंस रोग, या पीडी, एक पुराना न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो हमारे शरीर के मूवमेंट को प्रभावित करता है. यह दिमाग में डोपामाइन-प्रोडूसिंग न्यूरॉन्स के बिगड़ने से होता है. इसमें डोपामाइन की कमी हो जाती है. बता दें, शरीर में डोपामाइन हमारे मूवमेंट को कंट्रोल करता है. डॉ. सुधीर ने यह भी बताया कि माइक्रोग्राफिया पार्किंसंस रोग का शुरुआती लक्षण हो सकता है. पार्किंसंस रोग के 50 प्रतिशत से अधिक रोगियों में माइक्रोग्राफिया पाया जाता है.

माइक्रोग्राफिया का ट्रीटमेंट क्या है?

बताते चलें कि माइक्रोग्राफिया का ट्रीटमेंट मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है. लेकिन कुछ ट्रीटमेंट है जो इसे कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं जैसे इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर मेडिकेशन शुरू करते हैं. इसके अलावा, कुछ फिजिकल थेरेपी की भी सलाह देते हैं.