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Dental Care: क्या हर कैविटी में रूट कैनाल जरूरी है? जानिए किन मामलों में सिर्फ फिलिंग से हो जाता है इलाज

कई बार लोग दांत में हुई कैविटी को काफी हल्के में लेते हैं. वह इलाज में काफी देरी करते हैं. दांत के इलाज में आप जितनी देरी करते हैं, उतना ही नुकसान बढ़ता जाता है. इसलिए बेहतर हैं कि आप समय रहते अपना इलाज करवा लें.

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दांत में कैविटी होना एक आम परेशानी है. कई लोग जैसे ही डॉक्टर से सुनते हैं कि दांत में कीड़ा लग गया है, उन्हें लगता है कि अब रूट कैनाल कराना ही पड़ेगा. लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. हर कैविटी का इलाज रूट कैनाल नहीं होता. डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि सड़न कितनी गहरी है और क्या दांत के अंदर मौजूद नस (पल्प) तक इंफेक्शन पहुंचा है या नहीं. इन्ही सब को देखने के बाद ही इलाज किया जाता है.

कब केवल फिलिंग है काफी?

अगर कैविटी अभी बस शुरू ही हुई है और दांत की बाहरी परत तक ही हुई है, तो आमतौर पर फिलिंग करके दांत को बचाया जा सकता है. इस प्रोसेस में खराब हिस्सा साफ करके उसकी जगह खास फिलिंग मटेरियल भर दिया जाता है. इससे दांत वापस पहले जैसा काम करने लगता है और रूट कैनाल की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए समय पर डेंटिस्ट के पास जाना बहुत जरूरी है.

कब है रूट कैनाल की जरूरत?

जब कैविटी बहुत गहरी हो जाती है और इंफेक्शन दांत की नस तक पहुंच जाता है, तब रूट कैनाल की जरूरत पड़ सकती है. इसके सिप्टम है लगातार तेज दर्द, ठंडा या गर्म खाने पर लंबे समय तक दर्द रहना, दांत पर दबाव डालने पर तकलीफ होना, मसूड़ों में सूजन या पस बनना शुरू होना. ऐसे हालात में केवल फिलिंग से काम नहीं चलता. यहां रूट कैनाल के जरिए खराब हुए हिस्से को निकाल दिया जाता है और दांत को बचाया जाता है.

कितना दर्द होता है रूट कैनाल में?

कई लोग रूट कैनाल के नाम से डर जाते हैं, लेकिन लेटेस्ट टेकनीक और लोकल एनेस्थीसिया की मदद से इस प्रोसेस को पहले की तुलना में काफी आरामदायक बना दिया गया है. बहुत मरीजों को इलाज के दौरान केवल फिलिंग जितनी ही दिक्कत महसूस होती है. असली परेशानी तब होती है, जब इलाज कराने में देरी कर दी जाती है.

हर कैविटी का इलाज एक जैसा नहीं होता. इसलिए इंटरनेट या किसी की सलाह तो मानकर यह नहीं मानना चाहिए कि रूट कैनाल ही होगा. पहले डेंटिस्ट को दिखाए उसके बाद ही सही इलाज का पता चल पाता है.