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पनीर खरीदने वालो हो जाएं सावधान! व्हाइटनिंग एजेंट से बनाया जा रहा नकली पनीर, 1038 किलो माल नष्ट

जांच के दौरान तीनों इकाइयों के उत्पादन परिसर में न केवल भारी गंदगी और अस्वच्छता मिली, बल्कि पनीर और खोया निर्माण में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल के प्रमाण भी मिले, जिनका इस तरह खाद्य पदार्थ तैयार करने में इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है.

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आमतौर पर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माने जाने वाले पनीर को लोग सेहतमंद भोजन समझकर परिवार की थाली में शामिल करते हैं, लेकिन मोदीनगर के नाहली गांव में पनीर के नाम पर जिस तरह का खेल सामने आया है, वह खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सेहत दोनों के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है. यहां तीन डेयरियों में दूध और क्रीम से प्राकृतिक तरीके से पनीर-खोया तैयार करने के बजाय वनस्पति, स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, एसिटिक एसिड, सफेद चूर्ण और रानीपाल जैसे पदार्थों के इस्तेमाल से पनीर तैयार किए जाने के प्रमाण मिले हैं. खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में मौके से 868 किलोग्राम पनीर और 170 किलोग्राम खोया, यानी कुल 1038 किलोग्राम खाद्य सामग्री, नष्ट कराई गई.

उत्पादन परिसर में मिली भारी गंदगी
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग तथा पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने कल बीती 12 अगस्त की रात करीब 11 बजे ग्राम नाहली में मैसर्स तोमर डेयरी, कलवा डेयरी और शकील डेयरी पर एक साथ छापा मारा. जांच के दौरान तीनों इकाइयों के उत्पादन परिसर में न केवल भारी गंदगी और अस्वच्छता मिली, बल्कि पनीर और खोया निर्माण में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल के प्रमाण भी मिले, जिनका इस तरह खाद्य पदार्थ तैयार करने में इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है.

मिल्क पाउडर, वनस्पति और रानीपाल से बना रहे थे नकली पनीर
जांच में सामने आया कि शकील डेयरी में मिल्क पाउडर, वनस्पति और रानीपाल समेत अन्य अपमिश्रक रसायन मिले. कलवा डेयरी में रिफाइंड पामोलीन ऑयल और अन्य अपमिश्रक रसायन पाए गए, जबकि तोमर डेयरी में वनस्पति और सफेद पाउडर बरामद हुआ. इन पदार्थों का इस्तेमाल पनीर निर्माण में किए जाने की बात सामने आई. यानी जिस पनीर को उपभोक्ता दूध की मलाई और प्रोटीन से तैयार प्राकृतिक खाद्य पदार्थ समझकर खरीदता है, उसकी जगह लागत घटाकर और मात्रा बढ़ाकर तैयार किए जाने वाले मिश्रण का इस्तेमाल किया जा रहा था. खाद्य सुरक्षा टीम ने तीनों इकाइयों से पनीर, खोया, वनस्पति, स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड पाम ऑयल, एसिटिक एसिड, सफेद चूर्ण, रानीपाल, दूध और क्रीम समेत कुल 20 नमूने लिए हैं. इन नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है. प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन खाद्य पदार्थों में किस स्तर तक मिलावट और अपमिश्रण किया गया था.

कपड़े चमकाने वाले रसायन तक का खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल
इस कार्रवाई में सबसे गंभीर पहलू रानीपाल की बरामदगी है. रानीपाल का इस्तेमाल सामान्य तौर पर डिटर्जेंट पाउडर, लिक्विड डिटर्जेंट और फैब्रिक व्हिटनर जैसे उत्पादों में कपड़ों का पीलापन दूर कर उन्हें अधिक सफेद दिखाने के लिए किया जाता है. ऐसे पदार्थ के खाद्य निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आना ही खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर चेतावनी है. खाद्य पदार्थ को देखने में सफेद और आकर्षक बनाने के लिए यदि किसी औद्योगिक व्हाइटनिंग एजेंट का सहारा लिया जाए तो उपभोक्ता के साथ छल के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकता है.

868 किलोग्राम पनीर जब्त
अस्वच्छ परिस्थितियों और खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन के चलते टीम ने मौके पर ही 868 किलोग्राम पनीर, जिसकी अनुमानित कीमत 2.11 लाख रुपये है, तथा 170 किलोग्राम खोया, जिसकी कीमत करीब 50,800 रुपये बताई गई, नष्ट करा दिया. इसके अलावा पनीर और खोया बनाने के लिए रखे गए 25 किलो सफेद पाउडर, चार किलो वनस्पति और 153 किलो रिफाइंड पामोलीन ऑयल को जब्त किया गया.

खाद्य पदार्थों में अपमिश्रकों के इस्तेमाल और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए तीनों डेयरी संचालकों के खिलाफ थाना भोजपुर में भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है. फिलहाल लिए गए 20 नमूनों की जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम होगी. रिपोर्ट से यह भी सामने आएगा कि तैयार पनीर और खोया में इस्तेमाल किए गए पदार्थ किस स्तर तक खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत थे.

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