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एल्यूमिनियम, नॉन-स्टिक, प्लास्टिक या स्टेनलेस स्टील! भारतीय खाने के लिए कौन सा बर्तन है सेफ?

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल सिर्फ ठंडे और सूखे खाने के लिए करें. गरम खाना स्टोर करना या दोबारा गर्म करना प्लास्टिक में बिल्कुल न करें.

Cookware: Photo:https://unsplash.com/ Cookware: Photo:https://unsplash.com/
हाइलाइट्स
  • एल्यूमिनियम में खाना जल्दी गर्म, लेकिन पूरी तरह सेफ नहीं

  • भारतीय खाना बर्तनों पर ज्यादा असर क्यों डालता है?

हम क्या खाते हैं, इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है ये बात तो सब जानते हैं. लेकिन जिस बात पर हम ध्यान नहीं देते, वो ये है कि हम खाना किस तरह के बर्तन में पका रहे हैं और खा रहे हैं.

कई रिसर्च के मुताबिक, भारतीय खाना बर्तनों के लिए काफी टफ होता है. ज्यादा गर्मी, तेल, नमक और खट्टे तत्व मिलकर कुछ बर्तनों के साथ कैमिकल रिएक्शन कर सकते हैं. इससे न सिर्फ खाने का स्वाद बदल सकता है, बल्कि सेहत को भी नुकसान पहुंच सकता है.

भारतीय खाना बर्तनों पर ज्यादा असर क्यों डालता है?
भारतीय खाने में टमाटर, नींबू, इमली और दही जैसी चीजों का खूब इस्तेमाल होता है. इसके अलावा, खाना अक्सर देर तक उबाला जाता है या बहुत तेज आंच पर पकाया जाता है. ऐसी कुकिंग कंडीशन में हर बर्तन एक जैसा व्यवहार नहीं करता.

लैब टेस्ट में जब एक जैसी खट्टी ग्रेवी को अलग-अलग बर्तनों में पकाया गया, तो स्टेनलेस स्टील से बहुत ही कम मात्रा में धातु बाहर आई. वहीं, बिना कोटिंग वाले एल्यूमिनियम से बहुत ज्यादा मात्रा में एल्यूमिनियम खाने में मिल गया.

सस्ता और हल्का, लेकिन खतरे भरा प्लास्टिक
आजकल प्लास्टिक के डिब्बे हर घर में मिल जाते हैं. खाना स्टोर करना हो या माइक्रोवेव में गर्म करना, सब जगह प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है. लेकिन गर्म, ज्यादा तेल वाले या खट्टे खाने के साथ प्लास्टिक सबसे ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है.

गर्मी पड़ते ही प्लास्टिक से BPA और फ्थेलेट्स जैसे केमिकल्स खाने में मिल सकते हैं. 2023 की एक स्टडी में पाया गया कि गर्मी और फैट के संपर्क में आने पर प्लास्टिक से केमिकल्स तेजी से बाहर आते हैं. लंबे समय तक ऐसे केमिकल्स शरीर में जाएं तो हार्मोन से जुड़ी परेशानियां और मेटाबॉलिक दिक्कतें हो सकती हैं.

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल सिर्फ ठंडे और सूखे खाने के लिए करें. गरम खाना स्टोर करना या दोबारा गर्म करना प्लास्टिक में बिल्कुल न करें.

एल्यूमिनियम में खाना जल्दी गर्म, लेकिन पूरी तरह सेफ नहीं
एल्यूमिनियम के बर्तन भारतीय घरों में काफी आम हैं, क्योंकि ये जल्दी गर्म हो जाते हैं और सस्ते भी होते हैं. लेकिन दिक्कत तब आती है, जब इनमें खट्टा या ज्यादा नमक वाला खाना पकाया जाता है. बिना ट्रीटमेंट वाले एल्यूमिनियम से काफी मात्रा में धातु खाने में मिल सकती है. एनोडाइज्ड एल्यूमिनियम थोड़ा बेहतर माना जाता है, लेकिन उसकी कोटिंग समय के साथ घिस जाती है. ऐसे में लंबे समय तक इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता.

रोजाना इस्तेमाल के लिए सबसे सेफ है स्टेनलेस स्टील
स्टेनलेस स्टील, खासकर फूड-ग्रेड 304 और 316 भारतीय कुकिंग के लिए सबसे सेफ ऑप्शन है. इसमें एक खास सुरक्षात्मक परत होती है, जो खाने के साथ रिएक्शन नहीं करती. स्टेनलेस स्टील से बेहद कम मात्रा में धातु बाहर आती है, जो तय सेफ लिमिट के अंदर होती है. यह तेज आंच, खट्टे खाने और लंबे समय तक पकाने के बावजूद सुरक्षित रहता है.

सेहत पर लंबे समय बाद दिखता है असर
कुकवेयर का असर एक-दो बार में नहीं, बल्कि सालों में दिखता है. रोज-रोज थोड़ी-थोड़ी मात्रा में एल्यूमिनियम या प्लास्टिक के केमिकल्स शरीर में जाएं, तो ये जमा हो सकते हैं. ज्यादा एल्यूमिनियम को न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जोड़ा गया है, वहीं प्लास्टिक के केमिकल्स हार्मोन को बिगाड़ सकते हैं.

भारतीय खाना एल्यूमिनियम और प्लास्टिक जैसे कमजोर मटीरियल्स के साथ ज्यादा रिएक्ट करता है, जबकि स्टेनलेस स्टील सालों तक स्थिर रहता है. प्लास्टिक में खाना पकाने से विटामिन्स का नुकसान ज्यादा होता है, जबकि स्टेनलेस स्टील में पोषक तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं.

कौन सा बर्तन इस्तेमाल करना रहेगा सही
रोजमर्रा के खाने के लिए ISI मार्क वाला स्टेनलेस स्टील इस्तेमाल करें.

गरम खाना प्लास्टिक में न रखें और न ही उसमें दोबारा गर्म करें.

खट्टे खाने के लिए एल्यूमिनियम बर्तनों का इस्तेमाल न करें.

एल्यूमिनियम में बना खाना तुरंत दूसरे बर्तन में निकाल लें.