Health Tips
Health Tips
आधुनिक विज्ञान और योग विज्ञान दोनों का मानना है कि खाली पेट का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पॉजिटिव असर पड़ता है. आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने इसको लेकर अपने अनुभव साझा किए. उनका दावा है कि खाली पेट रहने की आदत अपनाने से लोगों की सेहत से संबंधी 50 फीसदी समस्याएं कम हो सकती हैं.
पेट खाली होना और भूख लगना अलग बात- सद्गुरु
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने साफ किया कि पेट खाली होना और भूख लगना दोनों अलग-अलग बातें हैं. उनका कहना था कि भूख लगना इस बात का संकेत है कि शरीर की ऊर्जा का स्तर कम हो रहा है, जबकि पेट का खाली होना शरीर के लिए फायदेमंद स्थिति है. योग विज्ञान के अनुसार, भोजन के बीच कम से कम आठ घंटे का अंतराल होना चाहिए. इससे शरीर को खुद को शुद्ध करने और अंदरूनी मरम्मत का पर्याप्त समय मिलता है.
कब भोजन करना चाहिए?
सद्गुरु जग्गी वासुदेव का कहना है कि आश्रम में भोजन का समय तय होता है. लोग सुबह लगभग 10 बजे और शाम को 7 बजे भोजन करते हैं. इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बनाया गया है. आश्रम में न तो गाड़ियों का इस्तेमाल होता है और न ही आरामतलबी को बढ़ावा दिया जाता है. लोग या तो पैदल चलते हैं या साइकिल का इस्तेमाल करते हैं. उनका मानना है कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप जितना भी खाएं, वह दो से ढाई घंटे में पच जाए और पेट फिर से खाली हो सके.
खाली पेट रहने से खत्म हो सकती है 50 फीसदी बीमारी-
स्वास्थ्य समस्याओं पर इसके असर को लेकर उन्होंने बड़ा दावा किया. उनका मानना है कि अगर कोई व्यक्ति केवल खाली पेट रहने की आदत को गंभीरता से अपना ले, तो छह हफ्तों के भीतर उसकी लगभग आधी स्वास्थ्य समस्याएं अपने आप खत्म हो सकती हैं. वहीं, अगर इसके साथ योग अभ्यास या ध्यान प्रक्रिया भी जोड़ ली जाए, तो 90 फीसदी तक समस्याओं में राहत संभव है.
सेहत को भीतर से पैदा करना होता है- सद्गुरु
उनका कहना है कि आधुनिक विज्ञान भी अब इस बात को मानने लगा है कि खाली पेट रहने से शरीर और दिमाग अधिक कुशलता से काम करते हैं. उनका कहना था कि सेहत ऐसी चीज नहीं है जिसे आप बाहर से बना लें. सेहत आपको अपने भीतर से पैदा करनी होती है.
उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग अनियमित और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला भोजन करते हैं और फिर डॉक्टर से उम्मीद करते हैं कि वह हर समस्या का समाधान कर देगा. उनका कहना है कि यह तरीका काम नहीं करता, क्योंकि मानव शरीर की हर कोशिका खुद सेहत पैदा करने के लिए बनी है.
ये भी पढ़ें: