scorecardresearch

कैंसर के इलाज में बड़ी कामयाबी! सिंपल ब्लड टेस्ट बताएगा मरीजों के लिए सबसे असरदार ट्रीटमेंट

यह टेस्ट भविष्य में इलाज को और ज्यादा पर्सनलाइज्ड बना सकता है. इससे डॉक्टर जल्दी फैसला ले सकेंगे कि इलाज बदलना है या नहीं.

Breast cancer detection Breast cancer detection
हाइलाइट्स
  • समय पर इलाज मिले तो जान बचना संभव

  • खून की जांच से मिलेगा इलाज के असर का शुरुआती संकेत

  • किस मरीज पर कौन-सी दवा असर करेगी

ब्रेस्ट कैंसर दुनिया में महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2022 में करीब 23 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पहचान हुई. इसी साल लगभग 6 लाख 70 हजार महिलाओं की इस बीमारी से मौत भी हुई. डॉक्टर्स का कहना है कि अगर ब्रेस्ट कैंसर का समय पर पता चल जाए और सही इलाज मिल जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.

इलाज के कई विकल्प मौजूद
हालांकि इलाज के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन यह समझना अब भी मुश्किल होता है कि किस मरीज पर कौन-सा इलाज सबसे ज्यादा असरदार होगा. आज के समय में कैंसर के इलाज में टारगेटेड थेरेपी, कीमोथेरेपी और नई दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. फिर भी कई बार मरीज को ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जो उस पर असर नहीं करतीं. इससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं और बीमारी आगे बढ़ने का खतरा भी रहता है.

ब्लड टेस्ट से मिलेगी इलाज की जानकारी
अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा DNA ब्लड टेस्ट विकसित किया है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि ब्रेस्ट कैंसर के मरीज पर दिया जा रहा इलाज कितना असरदार होगा. यह रिसर्च लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च (ICR) के वैज्ञानिकों ने की है और इसे Clinical Cancer Research जर्नल में प्रकाशित किया गया है. यह टेस्ट खासतौर पर एडवांस स्टेज ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

कैसे की गई रिसर्च
इस स्टडी में 167 मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए. इलाज शुरू होने से पहले और इलाज के चार हफ्ते बाद मरीजों के खून की जांच की गई. वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद कैंसर से जुड़े DNA के बेहद छोटे अंशों को देखा, जिसे सर्कुलेटिंग ट्यूमर ctDNA कहा जाता है. इसके बाद ctDNA के स्तर की तुलना मरीजों की बीमारी बढ़ने की रफ्तार और इलाज के असर से की गई.

ctDNA का स्तर कम वालों पर इलाज का असर ज्यादा
रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों में इलाज शुरू होने से पहले ctDNA का स्तर कम था, उन पर इलाज का असर ज्यादा अच्छा रहा. यही नहीं, चार हफ्ते बाद जिन मरीजों के खून में ctDNA नहीं मिला, उनकी बीमारी ज्यादा समय तक कंट्रोल में रही. इससे साफ है कि यह ब्लड टेस्ट इलाज की सफलता का शुरुआती संकेत दे सकता है.

दो ग्रुप में बांटे गए मरीज
स्टडी में मरीजों को दो ग्रुप में बांटा गया. पहले ग्रुप में ऐसे मरीज थे, जिनमें ESR1, HER2, AKT या PTEN जैसे जीन म्यूटेशन थे और उन्हें उसी हिसाब से टारगेटेड इलाज दिया गया. दूसरे ग्रुप में ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के मरीज थे, जिन्हें दो खास दवाओं का कॉम्बिनेशन दिया गया. दूसरे ग्रुप में जिन मरीजों का ctDNA कम था, उनकी बीमारी औसतन 10.2 महीने तक कंट्रोल में रही, जबकि ज्यादा ctDNA वालों में यह सिर्फ 4.4 महीने रही.