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मोटापे के खिलाफ चल रही जंग में अब एक नया खिलाड़ी सामने आया है और हैरानी की बात यह है कि यह खुद एक तरह की चर्बी है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने बताया है कि यह ब्राउन फैट मोटापे के इलाज में एक नई उम्मीद बन सकता है.
क्या है ब्राउन फैट?
ब्राउन फैट, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ब्राउन एडिपोज़ टिश्यू (Brown Adipose Tissue) कहा जाता है, शरीर में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है. यह मुख्य रूप से गर्दन और ऊपरी पीठ के आसपास मौजूद होता है. जहां व्हाइट फैट शरीर में ऊर्जा को संग्रहित करता है, वहीं ब्राउन फैट ऊर्जा को जलाकर गर्मी पैदा करता है.
ब्राउन फैट कैसे काम करता है?
ब्राउन फैट की सबसे खास बात यह है कि यह थर्मोजेनेसिस (Thermogenesis) नाम की प्रक्रिया करता है, यानी शरीर में गर्मी पैदा करना. ठंडे मौसम में यह प्रक्रिया शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करती है. ब्राउन फैट की कोशिकाएं माइटोकॉन्ड्रिया से भरपूर होती हैं, जो इसे इसका भूरा रंग देते हैं और कैलोरी जलाने में मदद करते हैं.
शरीर को गर्म करने की क्षमता
जब ब्राउन फैट सक्रिय होता है, तो यह नॉन-शिवरिंग थर्मोजेनेसिस नाम की प्रक्रिया से गुजरता है. इस दौरान कोशिकाएं ग्लूकोज़ और फैट मॉलेक्यूल्स को तोड़कर गर्मी पैदा करती हैं. यह प्रक्रिया न केवल शरीर को ठंड से बचाती है, बल्कि ऊर्जा खर्च (energy expenditure) को भी बढ़ाती है, जिससे वजन घटने की संभावना बढ़ जाती है.
शोध क्या कहता है?
एंडोक्राइन सोसाइटी के जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज़्म में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों में ब्राउन फैट अधिक सक्रिय होता है, वे कम सक्रिय ब्राउन फैट वाले लोगों की तुलना में लगभग 15% अधिक कैलोरी जलाते हैं.
मोटापे के इलाज में नई दिशा
ब्राउन फैट पर हो रहे शोध से संकेत मिलते हैं कि भविष्य में इसे वजन घटाने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए उपयोग किया जा सकता है. जहां पहले फैट को सिर्फ शरीर की अनचाही चर्बी माना जाता था, वहीं अब ब्राउन फैट यह साबित कर रहा है कि हर फैट बुरा नहीं होता.