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मेडिकल इमरजेंसी से पहले परिवारों को किन बातों की तैयारी करनी चाहिए?

भारत में ज्यादातर परिवार मेडिकल इमरजेंसी में नहीं, बल्कि इमरजेंसी से पहले गलती करते हैं. ये गलती दस्तावेजों को तैयार नहीं रखना होती है. जब कोई बीमार पड़ता है, तब घर के लोग सोचते हैं कि कौन से अस्पताल जाएं? इंश्योरेंस के कागज कहां हैं? ब्लड ग्रुप क्या है? डॉक्टर का नंबर याद नहीं. इन सवालों में फंसना कभी-कभी महंगा पड़ जाता है. इसलिए इन चीजों की पहले से तैयारी रखनी चाहिए.

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भारत में हर साल लाखों परिवार मेडिकल इमरजेंसी का सामना करते हैं और उनमें से ज्यादातर आर्थिक रूप से तैयार नहीं होते. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में स्वास्थ्य खर्च का लगभग 39% अभी भी लोग अपनी जेब से देते हैं. करीब 40 करोड़ भारतीयों के पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है. और जिनके पास है, उनमें से कई की पॉलिसी असली जरूरत के वक्त काफी नहीं होती. 
बीमारी बताकर नहीं आती. लेकिन तैयारी पहले से की जा सकती है.

मेडिकल इमरजेंसी के दौरान परिवार सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?

देखा जाए तो ज्यादातर परिवार इमरजेंसी में नहीं बल्कि इमरजेंसी से पहले गलती करते हैं, और वो गलती है कुछ भी तैयार न रखना. 
जब कोई अचानक बेहोश हो जाए, सीने में दर्द हो, या बच्चे को तेज बुखार आ जाए, तब घर के लोग एक साथ कई सवालों में फंस जाते हैं. कौन से अस्पताल जाएं? इंश्योरेंस के कागज कहां हैं? ब्लड ग्रुप क्या है? डॉक्टर का नंबर याद नहीं.

इन सवालों का जवाब ढूंढने में जो वक्त जाता है, वो कभी-कभी बहुत महंगा पड़ता है.
 
दूसरी बड़ी गलती- सिर्फ एक व्यक्ति को सारी जानकारी होना. अगर वही बीमार पड़ जाए, तो बाकी घर क्या करेगा?
 
क्या आपके परिवार के सभी सदस्यों को जरूरी मेडिकल जानकारी पता है? 

घर के हर बड़े सदस्य को ये बातें पता होनी चाहिए: 

  • परिवार के हर सदस्य का ब्लड ग्रुप 
  • कोई पुरानी बीमारी है- जैसे शुगर, बीपी, हार्ट की तकलीफ, तो उसकी जानकारी 
  • कौन-सी दवाइयां नियमित चल रही हैं, और किस डोज में 
  • किसी को किस चीज से एलर्जी है- खाने से, दवाई से 
  • घर के डॉक्टर का नाम और नंबर 
  • नजदीकी अस्पताल कौन सा है और वो कितनी दूर है 

यह जानकारी एक जगह लिखकर रखें. मोबाइल में नोट करें, और घर में एक कागज पर भी लिखकर रखें. इमरजेंसी में फोन की बैटरी खत्म हो सकती है, नेटवर्क नहीं आ सकता. 

इसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि परिवार के पास एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हो जो सभी सदस्यों को कवर करे. बीमारी की जानकारी और सही इंश्योरेंस- दोनों मिलकर इमरजेंसी को संभालने में मदद करते हैं. 

घर में कौन-कौन से मेडिकल दस्तावेज हमेशा तैयार रखने चाहिए? 

अस्पताल में भर्ती होते वक्त सबसे पहले कागज मांगे जाते हैं. जो तैयार नहीं होते, उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है.

घर में एक मेडिकल फाइल बनाएं, जिसमें ये रखें: 

  • परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड
  • पिछले दो साल की खून की जांच और स्कैन रिपोर्ट्स 
  • नियमित दवाइयों का ताजा पर्चा 
  • इंश्योरेंस पॉलिसी का नंबर, कंपनी का हेल्पलाइन नंबर, और कार्ड 
  • पुराने ऑपरेशन या बड़ी बीमारी का रिकॉर्ड 
  • डिस्चार्ज समरी अगर पहले कभी अस्पताल में भर्ती रहे हों

इस फाइल की एक फोटो कॉपी और एक डिजिटल कॉपी भी बनाएं. गूगल ड्राइव या DigiLocker पर रखें- ताकि कहीं से भी मिल सके. हर छह महीने में इसे अपडेट करें.

इमरजेंसी में सही अस्पताल चुनने की तैयारी पहले से कैसे की जा सकती है? 

इमरजेंसी में यह सोचने का वक्त नहीं होता कि कौन सा अस्पताल अच्छा है। यह काम पहले से करना होगा.

अभी ही पता कर लें: 

  • घर के आसपास कौन से सरकारी और प्राइवेट अस्पताल हैं? 
  • 24 घंटे इमरजेंसी सेवा कहां मिलती है? 
  • ICU और ऑपरेशन थिएटर की सुविधा कहां है? 
  • आपकी इंश्योरेंस कंपनी के नेटवर्क में कौन से नजदीकी अस्पताल हैं? 

यह आखिरी बात सबसे जरूरी है. नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस इलाज होता है- यानी पहले से पैसे देने की जरूरत नहीं पड़ती. इंश्योरेंस कंपनी सीधे अस्पताल को भुगतान करती है. गैर-नेटवर्क अस्पताल में इलाज करवाने पर पहले अपनी जेब से देना पड़ता है, फिर रीइंबर्समेंट के लिए आवेदन करना होता है- जो एक लंबी प्रक्रिया है.

अचानक आने वाले मेडिकल खर्च परिवार के बजट को कैसे प्रभावित कर सकते हैं? 

भारत में मेडिकल खर्च हर साल लगभग 14% की दर से बढ़ रहा है, जो आम महंगाई से तीन गुना ज्यादा है. प्राइवेट अस्पताल में एक हफ्ते की भर्ती आसानी से ₹1-2 लाख तक पहुंच सकती है. कैंसर, हार्ट सर्जरी या किडनी का इलाज ₹5-15 लाख तक जा सकता है.

ऐसे में जो परिवार तैयार नहीं होते, वो क्या करते हैं? एफडी तोड़ते हैं. बच्चे की पढ़ाई के पैसे निकालते हैं. घर के गहने बेचते हैं. रिश्तेदारों से उधार मांगते हैं. कभी-कभी ऊंचे ब्याज पर कर्ज भी लेना पड़ता है.

और यह सब उस वक्त होता है जब परिवार पहले से ही भावनात्मक तनाव में होता है. इसीलिए पैसों की तैयारी, मेडिकल तैयारी जितनी ही जरूरी है. 

क्या आपके पास मेडिकल इमरजेंसी के लिए वित्तीय व्यवस्था तैयार है?

मेडिकल इमरजेंसी के लिए आर्थिक तैयारी तीन स्तरों पर होनी चाहिए: 

इमरजेंसी फंड: कम से कम तीन से छह महीने के घर के खर्च के बराबर रकम एक अलग बचत खाते में रखें. इसे सिर्फ असली इमरजेंसी के लिए रखें. 

हेल्थ इंश्योरेंस: अच्छी पॉलिसी जो परिवार के सभी सदस्यों को कवर करे. ध्यान रखें- पॉलिसी खरीदने के बाद वेटिंग पीरियड होता है, इसलिए इसे पहले से लेना जरूरी है, बीमारी आने पर नहीं.

बैकअप विकल्प: जानें कि जरूरत पड़ने पर बैंक से पर्सनल लोन कितनी जल्दी मिल सकता है. कुछ बैंक 24 घंटे में लोन देते हैं. यह तीसरा विकल्प होना चाहिए, पहला नहीं.

मेडिकल इमरजेंसी के समय हेल्थ इंश्योरेंस कैसे मदद कर सकता है? 

हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त सिर्फ प्रीमियम नहीं, ये बातें भी जरूर देखें:

  • सम इंश्योर्ड: मेट्रो शहरों में कम से कम ₹10-15 लाख का कवर लें. ₹5 लाख आज के दौर में बड़ी बीमारी के लिए पर्याप्त नहीं है. 
  • नेटवर्क अस्पताल: क्या आपके नजदीकी अच्छे अस्पताल नेटवर्क में हैं? 
  • वेटिंग पीरियड: पहले से चली आ रही बीमारियों पर आमतौर पर 2-4 साल का वेटिंग पीरियड होता है. 
  • रूम रेंट लिमिट: कुछ पॉलिसियों में रोज के कमरे के किराए की सीमा होती है. अगर आप उससे महंगा कमरा लेते हैं तो पूरे बिल पर कटौती हो सकती है.
  • को-पेमेंट: क्या इलाज का कुछ हिस्सा आपको खुद देना होगा? 

इन बातों को पहले से समझना, क्लेम के वक्त की परेशानी से बचाता है.

परिवार को साल में कितनी बार अपनी मेडिकल तैयारी की समीक्षा करनी चाहिए?

साल में कम से कम एक बार, और परिवार में कोई बड़ा बदलाव हो तो तुरंत.

हर साल यह जरूर देखें: 

  • फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का नवीनीकरण हुआ या नहीं? और क्या पॉलिसी की रकम आज के मेडिकल खर्च के हिसाब से पर्याप्त है? 
  • क्या पॉलिसी में नए परिवार के सदस्य- जैसे नया बच्चा या बुजुर्ग माता-पिता- जुड़े हैं? 
  • मेडिकल फाइल में ताजा रिपोर्ट और पर्चे हैं? 
  • इमरजेंसी फंड अभी भी पर्याप्त है या खर्च हो गया? 
  • डॉक्टर और अस्पताल के नंबर अपडेट हैं? 

इसे एक आदत बनाएं. नए साल की शुरुआत में, या हर साल एक तय तारीख को- यह समीक्षा करें.

एक परिवार की मेडिकल इमरजेंसी चेकलिस्ट में क्या-क्या होना चाहिए? 

यह चेकलिस्ट घर में दिखने वाली जगह पर लगाएं: 

तुरंत जरूरी नंबर: 

  • एम्बुलेंस- 108 (पूरे भारत में मुफ्त) 
  • आपातकालीन सेवाएं- 112 
  • घर के डॉक्टर का नंबर 
  • नजदीकी अस्पताल का इमरजेंसी नंबर 
  • हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर 

मेडिकल जानकारी: 

  • हर सदस्य का ब्लड ग्रुप 
  • पुरानी बीमारियां और चल रही दवाइयां 
  • एलर्जी की जानकारी 

दस्तावेज तैयार रखें: 

  • आधार कार्ड 
  • इंश्योरेंस पॉलिसी नंबर और कार्ड 
  • पिछली मेडिकल रिपोर्ट्स 
  • नियमित दवाइयों का पर्चा 

आर्थिक तैयारी: 

  • इमरजेंसी फंड का बैंक खाता नंबर 
  • परिवार के किस सदस्य को क्या करना है- यह पहले से तय हो 

मेडिकल इमरजेंसी में तैयारी ही सबसे बड़ी मदद साबित होती है-

जब परिवार में कोई अचानक बीमार पड़ता है, तब सबसे ज्यादा जरूरत होती है- शांत दिमाग और तैयार हाथ. शांत दिमाग तभी रहता है जब सब कुछ पहले से सोचा हुआ हो. और तैयार हाथ तभी होते हैं जब जरूरी चीजें सही जगह पर हों. 

इस लेख में बताई गई हर बात छोटी लग सकती है, लेकिन मिलकर ये एक मजबूत ढाल बनाती हैं. दस्तावेज तैयार हों. इंश्योरेंस सक्रिय हो. इमरजेंसी फंड हो. नंबर पास हों. और हर साल एक बार इसकी समीक्षा हो.

निष्कर्ष-
भारत में मेडिकल खर्च हर साल बढ़ रहा है. 40 करोड़ लोगों के पास अभी भी कोई इंश्योरेंस नहीं है. और जिनके पास है, उनमें से कई की पॉलिसी जरूरत के वक्त नाकाफी साबित होती है. 
लेकिन इस समस्या का एक सीधा हल है- पहले से तैयारी.
मेडिकल इमरजेंसी आने पर आप बहुत कुछ नहीं बदल सकते. लेकिन आज आप बहुत कुछ तैयार कर सकते हैं. सही इंश्योरेंस लेना, जरूरी कागज एक जगह रखना, परिवार को जानकारी देना- ये छोटे कदम हैं. लेकिन जब इमरजेंसी आती है, तब यही छोटे कदम सबसे बड़ी मदद बनते हैं. 

आज की तैयारी, कल का सहारा है.

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