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Expert Talk: बारिश और मौसम में बदलाव के साथ क्यों हो रहा है बुखार, जुकाम और शरीर दर्द? एक्सपर्ट से जानिए कैसे करें बचाव

बदलते मौसम का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है. अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज सर्दी, खांसी, बुखार, वायरल संक्रमण और कुछ मामलों में पेट से जुड़ी मौसमी समस्याओं की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं.

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सुबह घर से निकलते हैं तो तेज धूप मिलती है, कुछ घंटों बाद झमाझम बारिश शुरू हो जाती है और फिर उमस से हाल बेहाल हो जाता है. ऐसे मौसम में अगर आपको या आपके आसपास किसी को अचानक बुखार, गले में खराश, नाक बहना या लगातार खांसी होने लगे तो हैरान होने की जरूरत नहीं है.

इन दिनों अस्पतालों और क्लीनिकों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, गले के संक्रमण और मौसमी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. खासकर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोग इसका शिकार ज्यादा हो रहे हैं. अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज सर्दी, खांसी, बुखार, वायरल संक्रमण और कुछ मामलों में पेट से जुड़ी मौसमी समस्याओं की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. मौसम बदलने पर लोग बार-बार क्यों बीमार पड़ रहे हैं, किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? खुद का ख्याल कैसे रखें इन सभी सवालों के जवाब के लिए GNT ने बात की मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम के पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. सनी कालरा से.

सवाल: आखिर बारिश के मौसम में संक्रमण क्यों बढ़ जाता है?
मानसून के दौरान तापमान में लगातार बदलाव, हवा में बढ़ी नमी और लोगों का लंबे समय तक बंद या कम हवादार जगहों पर रहना, श्वसन संबंधी वायरस के फैलने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है.

बारिश के दौरान लोग अक्सर ऑफिस, स्कूल, मॉल, सार्वजनिक परिवहन और अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर अधिक समय बिताते हैं. ऐसे में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाता है. वहीं बाहर की गर्म और उमस भरी हवा से सीधे ठंडे एयर कंडीशनर वाले कमरे में जाने से नाक और गले की अंदरूनी परत पर असर पड़ सकता है, जिससे संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है.

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सवाल: क्या मौसम बदलने से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है?
अक्सर कहा जाता है कि मौसम बदलते ही इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा अचानक नहीं होता. मौसम में बदलाव सीधे रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम नहीं करता, बल्कि ऐसी परिस्थितियां पैदा करता है जिनमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

तापमान और नमी में बदलाव श्वसन तंत्र की सुरक्षा की परत को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा कम नींद लेना, पर्याप्त पानी न पीना, पोषण की कमी, लगातार तनाव और पहले से मौजूद बीमारियां शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए बदलते मौसम में संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है.

सवाल: वायरल फीवर और मौसमी फ्लू में क्या अंतर है?
कई बार लोग सामान्य वायरल संक्रमण और मौसमी फ्लू (इन्फ्लूएंजा) को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों में कुछ अंतर होते हैं.

सामान्य वायरल संक्रमण में हल्का या मध्यम बुखार, नाक बहना या बंद होना, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.

वहीं मौसमी फ्लू में लक्षण अचानक शुरू होते हैं. इसमें तेज बुखार, ठंड लगना, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द, अत्यधिक थकान और तेज खांसी अधिक देखने को मिलती है.

हालांकि कई बार दोनों के लक्षण एक जैसे भी हो सकते हैं. ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना आसान नहीं होता. अगर तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द, भ्रम, ऑक्सीजन कम होना या कमजोरी लगातार बढ़ती जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

सवाल: किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

  • छोटे बच्चे

  • 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग

  • गर्भवती महिलाएं

  • अस्थमा, सीओपीडी, डायबिटीज, हृदय रोग या किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीज

  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग

 

सवाल: वायरल फीवर होने पर घर पर क्या करें?
अधिकांश वायरल संक्रमण कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं और इनके लिए आराम व सही देखभाल ही सबसे जरूरी इलाज है. बीमार होने पर पर्याप्त आराम करें और दिनभर पानी, सूप, नारियल पानी या अन्य तरल पदार्थ लेते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. हल्का और पौष्टिक भोजन करें. गले में दर्द होने पर गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने से राहत मिल सकती है. बुखार की दवा केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं नहीं खानी चाहिए, क्योंकि एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण पर असर नहीं करतीं और इनके अनावश्यक इस्तेमाल से दवा प्रतिरोध (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) जैसी समस्या बढ़ सकती है.

सवाल: कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
अगर बुखार 2 से 3 दिन से ज्यादा बना रहे, सांस लेने में दिक्कत हो, सीने में दर्द हो, बार-बार उल्टी हो, शरीर में पानी की कमी महसूस हो, ऑक्सीजन का स्तर कम हो या मरीज असामान्य रूप से सुस्त दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

इन आसान उपायों से खुद को रखें सुरक्षित
बारिश के मौसम में संक्रमण से बचाव के लिए कुछ छोटी-छोटी आदतें काफी मददगार हो सकती हैं. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोएं. खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या कोहनी से ढकें. पर्याप्त नींद लें, संतुलित आहार खाएं और दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें. यदि बुखार, खांसी या गले में संक्रमण है तो दूसरों के बहुत करीब जाने से बचें, ताकि संक्रमण आगे न फैले.