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World Hepatitis Day: कूली हादसे के बाद अमिताभ बच्चन को हुआ था हेपेटाइटिस-बी, 23 साल तक नहीं चला पता, आज भी सिर्फ 25% लिवर के सहारे जी रहे हैं

World Hepatitis Day 2026: दुनियाभर में करीब 30 करोड़ लोग वायरल हेपेटाइटिस के साथ जीवन जी रहे हैं. हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है.

Amitabh Bachchan recalls coolie incident Amitabh Bachchan recalls coolie incident
हाइलाइट्स
  • क्या है हेपेटाइटिस-बी, कैसे फैलता है संक्रमण?

  • हर साल 13 लाख लोगों की जाती है जान

हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है, ताकि लोगों को हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके. यह बीमारी धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाती है और कई बार शुरुआती दौर में इसके कोई लक्षण भी दिखाई नहीं देते. खुद अमिताभ बच्चन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं. फिल्म 'कूली' की शूटिंग के दौरान हुए हादसे के बाद चढ़ाए गए संक्रमित खून की वजह से उन्हें हेपेटाइटिस-बी हो गया था. हैरानी की बात यह है कि उन्हें इस बीमारी का पता पूरे 23 साल बाद चला, तब तक उनके लिवर का 75 प्रतिशत हिस्सा खराब हो चुका था.

कूली हादसे ने बदल दी थी अमिताभ की जिंदगी
अमिताभ बच्चन ने 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) के एक एपिसोड में अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया था कि 1982 में फिल्म 'कूली' की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन में उन्हें गंभीर चोट लगी थी. हालत इतनी गंभीर थी कि उनकी जान बचाने के लिए तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और बड़ी मात्रा में खून चढ़ाया गया.

अमिताभ के मुताबिक, उस समय करीब 200 लोगों ने उनके लिए ब्लड डोनेट किया था और उन्हें लगभग 60 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया. इन्हीं में से एक यूनिट में हेपेटाइटिस-बी वायरस मौजूद था. उस दौर में स्क्रीनिंग तकनीक आज जितनी विकसित नहीं थी, इसलिए संक्रमण का पता नहीं चल सका और वायरस उनके शरीर में पहुंच गया.

23 साल तक शरीर में रहा वायरस
अमिताभ ने बताया कि 1982 में शरीर में पहुंचा यह वायरस 2005 तक उन्हें बिना किसी बड़े लक्षण के प्रभावित करता रहा. एक सामान्य हेल्थ चेकअप के दौरान डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि उनका लिवर 75 प्रतिशत तक खराब हो चुका है. हालांकि समय पर इलाज, नियमित जांच और अनुशासित जीवनशैली की बदौलत वह आज भी सक्रिय जीवन जी रहे हैं.

क्या है हेपेटाइटिस-बी?
हेपेटाइटिस-बी एक वायरल संक्रमण है, जो लिवर को प्रभावित करता है. यह बीमारी संक्रमित खून, संक्रमित सुई, असुरक्षित मेडिकल प्रक्रियाओं या शरीर के कुछ तरल पदार्थों के संपर्क से फैल सकती है. कई लोगों में लंबे समय तक इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन वायरस लगातार लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है. अगर समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

हर साल 28 जुलाई को क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे?
हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day) मनाया जाता है. यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग (Dr. Baruch Blumberg) की जयंती पर मनाया जाता है. उन्होंने ही हेपेटाइटिस-बी वायरस की खोज की थी और इसके खिलाफ वैक्सीन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस दिन का उद्देश्य लोगों को वायरल हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक करना है.

दुनियाभर में करोड़ों लोग हैं प्रभावित
दुनियाभर में करीब 30 करोड़ लोग वायरल हेपेटाइटिस के साथ जीवन जी रहे हैं. हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है. हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है. इसके अलावा समय पर जांच, सुरक्षित रक्त चढ़ाना, एक बार इस्तेमाल होने वाली सिरिंज का उपयोग और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में सावधानी बरतने से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.

नियमित जांच क्यों है जरूरी?
हेपेटाइटिस-बी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते. कई लोगों को सालों तक पता ही नहीं चलता कि उनका लिवर धीरे-धीरे खराब हो रहा है. इसलिए डॉक्टर समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराने की सलाह देते हैं, खासकर उन लोगों को जिन्हें कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ हो, सर्जरी हुई हो या संक्रमण का जोखिम रहा हो.