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Nail Biting Habit: क्या इंसान नर्वस होने पर चबाता है नाखून.. या यह किसी बीमारी का संकेत है, कब लेनी चाहिए डॉक्टरी मदद?

नाखून चबाना भले ही एक छोटी आदत लगे, लेकिन इसके पीछे छिपे कारणों को समझना जरूरी है.

Nail Biting Nail Biting

हमारे आसपास ऐसे कई लोग होते हैं, जिनकी कुछ आदतें देखने में नॉर्मल लगती हैं, लेकिन असल में उनके पीछे गहरी साइकोलॉजी छिपी होती है. नाखून चबाना भी ऐसी ही एक आम लेकिन अजीब आदत है, जिसे मेडिकल भाषा में 'ओनिकोफेगिया' कहा जाता है. यह आदत अक्सर बचपन से शुरू होती है और कई लोगों में बड़े होने तक बनी रहती है. हैरानी की बात यह है कि यह सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ों में भी काफी आम है.

नाखून चबाने की आदत के पीछे कई मानसिक और इमोश्नल कारण हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक विकास में किसी तरह की कमी या असंतुलन की ओर इशारा कर सकती है. कुछ शोध इसे कई अन्य कारणों से भी जोड़ते हैं, जैसे तनाव, चिंता और व्यवहारिक पैटर्न.

तनाव, बोरियत और भावनाओं से जुड़ा व्यवहार
अक्सर लोग तनाव या चिंता के समय अपने नाखून चबाने लगते हैं. यह एक तरह का सेल्फ-कम्फर्टिंग बिहेवियर होता है, जिससे उन्हें टेंपोरेरी राहत मिलती है. वहीं, जब व्यक्ति बोरियत महसूस करता है, तो नाखून चबाने से उसका ध्यान बंट जाता है.  इसके अलावा अकेलापन बेचैनी जैसी भावनाएं भी इस आदत को बढ़ावा देती हैं.

मानसिक विकारों से भी हो सकता है संबंध
कई मामलों में नाखून चबाना कुछ साइकोलॉजिकल स्थितियों का संकेत भी हो सकता है. यह ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) से जुड़ा हो सकता है, जिसमें व्यक्ति बार-बार एक ही व्यवहार दोहराता है. इसके अलावा बच्चों में यह आदत अटेंशन डेफिशिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD), सेपरेशन एंग्जायटी और अन्य व्यवहारिक समस्याओं से भी जुड़ी पाई गई है.

किन लोगों में होती है ज्यादा आम
यह आदत उन लोगों में भी ज्यादा देखने को मिलती है, जो अपने काम में परफेक्शन चाहते हैं और हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव महसूस करते हैं. ऐसे लोग जल्दी ऊब जाते हैं या चिड़चिड़े हो जाते हैं, जिससे वे बॉडी-फोकस्ड रिपीटिव बिहेवियर (BFRB) का शिकार हो सकते हैं. इस स्थिति में नाखून चबाना एक कंपल्सिव आदत बन जाती है, जिसे रोकना आसान नहीं होता.