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Women’s Day: ऑफिस-घर की डबल जिम्मेदारी से बिगड़ रही महिलाओं की सेहत? एनीमिया-विटामिन की कमी से लेकर घंटों बैठने तक… डॉक्टर से जानिए 5 बड़े खतरे और बचाव

सुबह से रात तक घर और ऑफिस के बीच भागदौड़, अनियमित खानपान, लंबे समय तक बैठकर काम करना और तनाव...ये सब धीरे-धीरे महिलाओं के शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगते हैं.

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हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं के योगदान, संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है. आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, वह ऑफिस में भी जिम्मेदारियां संभाल रही है, फैसले ले रही है और परिवार भी देख रही हैं. लेकिन इस दोहरी जिम्मेदारी के बीच अक्सर उनकी अपनी सेहत पीछे छूट जाती है.

घर और ऑफिस...सिर्फ काम और काम
सुबह से रात तक घर और ऑफिस के बीच भागदौड़, अनियमित खानपान, लंबे समय तक बैठकर काम करना और तनाव...ये सब धीरे-धीरे महिलाओं के शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगते हैं. इसी वजह से आज कई वर्किंग वुमन लगातार थकान, सिरदर्द, पीठ और गर्दन दर्द, नींद की समस्या, हार्मोनल गड़बड़ी और पोषण की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं. हालांकि, ऐसा नहीं है कि ये दिक्कतें केवल कामकाजी महिलाओं तक ही सीमित हैं.

खुद को प्राथमिकता नहीं देती महिलाएं
हाउसवाइफ यानी गृहिणियां भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं. दिनभर घर के काम, परिवार की जिम्मेदारियां और दूसरों की जरूरतों को प्राथमिकता देने के कारण वे अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं. कई बार तो उन्हें अपनी परेशानी का एहसास भी देर से होता है, और जब तक डॉक्टर के पास पहुंचती हैं तब तक समस्या बढ़ चुकी होती है.

वुमन्स डे के मौके पर हमने मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा की प्रिंसिपल कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. शोवना वैश्नवी से बात की और कुछ जरूरी सवाल पूछे. डॉ. शोवना ने बताया यदि महिलाएं रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतों पर ध्यान दें जैसे बैलेंस डाइट, पर्याप्त नींद, रोजाना एक्सरसाइज और समय-समय पर हेल्थ चेकअप तो दिक्कतें कम हो सकती हैं.

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वर्किंग वुमन में सबसे आम हेल्थ समस्याएं कौन-सी होती हैं?
डॉ. शोवना बताती हैं, आज की वर्किंग वुमन कई तरह की जिम्मेदारियों को एक साथ निभाती हैं. ऑफिस का काम, घर की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल...एक महिला दरअसल अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा दे रही होती है. इन सबके बीच उनके लिए खुद का ख्याल रखना अक्सर मुश्किल हो जाता है.
इसी कारण कुछ हेल्थ समस्याएं काफी आम हो गई हैं.
1. लगातार थकान: कई महिलाएं दिनभर काम करने के बाद भी आराम नहीं कर पातीं. शरीर को पर्याप्त आराम न मिलने से लगातार थकान महसूस होती है.

2. सिरदर्द और माइग्रेन: ज्यादा स्क्रीन टाइम, तनाव और नींद की कमी सिरदर्द या माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं.

3. पीठ और गर्दन का दर्द: लंबे समय तक बैठकर काम करने से मसल्स पर दबाव पड़ता है, जिससे बैक पेन और नेक पेन की समस्या बढ़ती है.

4. नींद की समस्या: अनियमित दिनचर्या, देर रात तक काम और मानसिक तनाव के कारण कई महिलाओं को पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती.

5. हार्मोनल समस्याएं: आजकल पीसीओएस, थायरॉयड असंतुलन और मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं.

6. लाइफस्टाइल डिजीज: कम शारीरिक गतिविधि और खराब खानपान के कारण मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं.

डॉक्टरों के अनुसार, यदि इन शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में बदल सकती हैं.

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लंबे समय तक बैठकर काम करने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
डॉ. शोवना कहती हैं, आजकल ज्यादातर ऑफिस जॉब्स में लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना पड़ता है. यह आदत धीरे-धीरे शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित कर सकती है.

  • मांसपेशियों पर असर
    लंबे समय तक बैठने से गर्दन, कंधे और कमर की मांसपेशियों में तनाव बढ़ता है. इससे दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है.

  • मेटाबॉलिज्म धीमा होना
    जब शरीर लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है तो कैलोरी बर्न कम होती है. इससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है.

  • खराब पोस्चर
    कंप्यूटर स्क्रीन पर लगातार झुककर काम करने से पोस्चर खराब हो सकता है. आगे चलकर यह क्रॉनिक बैक पेन का कारण बन सकता है.

  • ब्लड सर्कुलेशन पर असर
    लंबे समय तक बैठने से ब्लड फ्लो धीमा पड़ सकता है, जिससे पैरों में भारीपन या सूजन महसूस हो सकती है.

  • मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा
    ज्यादा बैठने की आदत डायबिटीज और दिल की बीमारी के जोखिम को भी बढ़ा सकती है.

  • आंखों पर भी असर
    लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन और सिरदर्द हो सकता है. ऐसे में डॉक्टर कहती हैं, हर 45-60 मिनट में कम से कम 5 मिनट का मूवमेंट ब्रेक लेना जरूरी है.

महिलाओं में कौन-सी पोषण की कमी ज्यादा देखी जाती है?
आज की लाइफस्टाइल में महिलाएं अपने खानपान पर खास ध्यान नहीं दे पातीं. खासकर कामकाजी महिलाओं में ऑफिस के बिजी शेड्यूल के कारण सही समय पर खाना नहीं खा पातीं. अक्सर वे जल्दी में प्रोसेस्ड या जंक फूड का सहारा लेती हैं. इससे शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है.

 

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महिलाओं में सबसे ज्यादा तीन तरह की कमियां देखी जाती हैं.
1. आयरन की कमी (एनीमिया)
महिलाओं में आयरन की कमी काफी आम है. यह थकान, कमजोरी, चक्कर आना और ध्यान लगाने में कठिनाई का कारण बन सकती है.

2. विटामिन D की कमी
अधिकतर समय ऑफिस के अंदर रहने के कारण महिलाओं को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती. इससे विटामिन D की कमी हो सकती है, जो हड्डियों और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है. 

3. विटामिन B12 की कमी
जो महिलाएं शाकाहारी आहार लेती हैं, उनमें विटामिन B12 की कमी ज्यादा देखी जाती है क्योंकि यह विटामिन खास तौर से एनिमल बेस्ड फूड्स में पाया जाता है.

वर्किंग वुमन को रोज कितना व्यायाम करना चाहिए?
डॉक्टरों के अनुसार, वर्किंग वुमन को रोजाना लगभग 30 से 45 मिनट तक मध्यम स्तर का व्यायाम करना चाहिए. सिर्फ कामकाजी महिलाएं ही नहीं हाउस वाइफ को भी रोजाना एक्सरसाइज पर ध्यान देना चाहिए. जैसे

  • तेज चलना (ब्रिस्क वॉक)

  • साइक्लिंग

  • योग

  • स्विमिंग

  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

अगर रोज लगातार समय निकालना मुश्किल हो तो महिलाएं दिनभर में छोटे-छोटे एक्टिविटी ब्रेक भी ले सकती हैं. जैसे सीढ़ियां चढ़ना, थोड़ी देर चलना या हल्की स्ट्रेचिंग करना.

 

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महिलाएं अपनी सेहत बेहतर रखने के लिए कौन-सी छोटी आदतें अपना सकती हैं?
हेल्दी रहने के लिए बड़े बदलाव हमेशा जरूरी नहीं होते. कई बार छोटी-छोटी आदतें भी लंबे समय में बड़ा फर्क ला सकती हैं.
1. तय समय पर खाना खाएं
खाने के बीच बहुत लंबा गैप न रखें. संतुलित आहार लें जिसमें प्रोटीन, फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल हों.

2. पर्याप्त पानी पिएं
दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. इससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है और ऊर्जा बनी रहती है.

3. हर घंटे थोड़ा चलें
लंबे समय तक बैठने से बचें. हर घंटे 5 मिनट चलना या स्ट्रेचिंग करना शरीर के लिए फायदेमंद है.

4. सही पोस्चर बनाए रखें
कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के स्तर पर होनी चाहिए. कुर्सी और टेबल की ऊंचाई भी आरामदायक होनी चाहिए.

5. पर्याप्त नींद लें
रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए जरूरी है.

6. तनाव को मैनेज करें
योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीकें मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती हैं.

7. नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
समय-समय पर ब्लड टेस्ट और हेल्थ चेकअप कराने से कई समस्याओं का पता शुरुआती चरण में लग सकता है.