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World Alzheimer Day: अल्जाइमर में पुरानी यादें रहती हैं ताजा, सुबह की बात क्यों भूल जाता है मरीज? समझें वजह

अल्जाइमर के शुरुआती दौर में कोई व्यक्ति 40 साल पुरानी शादी की तारीख, बचपन का घर या स्कूल का गीत याद रख सकता है, लेकिन सुबह किससे क्या बात हुई थी, यह भूल सकता है.

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हाइलाइट्स
  • बचपन का घर याद, लेकिन घंटेभर पहले की बात भूल जाती है?

  • अल्जाइमर में ऐसा क्यों होता है?

क्या आप भी चाबी कहीं रखकर भूल जाते हैं? पूरा घर तलाशते हैं, सोफे के नीचे देखते हैं, अलमारी तक खंगाल लेते हैं और आखिर में वही चाबी टेबल पर रखी मिलती है, जहां आपने उसे रखा था. कभी किसी से बात करने के कुछ ही मिनट बाद याद नहीं रहता कि उसने क्या कहा था, लेकिन बचपन में स्कूल में हुआ कोई वाकया आज भी बिल्कुल साफ याद रहता है.

कभी-कभार ऐसा होना सामान्य भूलने की आदत हो सकती है. लेकिन जब कोई व्यक्ति बार-बार हाल की बातें भूलने लगे, एक ही सवाल दोहराए या रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने लगे, तो यह अल्जाइमर का संकेत हो सकता है.

अल्जाइमर को आमतौर पर याददाश्त खोने वाली बीमारी माना जाता है. लेकिन इसमें एक दिलचस्प बात देखने को मिलती है मरीज 30-40 साल पुरानी शादी, बचपन का घर या कोई गाना याद रख सकता है, लेकिन सुबह नाश्ते में क्या खाया था, यह याद नहीं रहता. आखिर ऐसा क्यों होता है?

नई याददाश्त बनाने वाला सिस्टम पहले प्रभावित होता है
वर्ल्ड अल्जाइमर डे पर GNT ने बात की मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के डायरेक्टर-न्यूरोलॉजी डॉ. मनीष गुप्ता से और उनसे जाने अल्जाइमर से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब.

अल्जाइमर में याददाश्त एक साथ और एक जैसी गति से प्रभावित नहीं होती. बीमारी के शुरुआती दौर में दिमाग के वे हिस्से ज्यादा प्रभावित होते हैं, जो नई जानकारी को याद रखने और उसे व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनमें हिप्पोकैम्पस और उसके आसपास के हिस्से प्रमुख हैं.

इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए, दिमाग में नई जानकारी को सेव करने का एक सिस्टम होता है. अल्जाइमर में शुरुआती असर इस सेव बटन पर पड़ सकता है. इसलिए व्यक्ति किसी से अभी-अभी हुई बातचीत, कुछ देर पहले खाया खाना या अभी पूछे गए सवाल को याद नहीं रख पाता.

Alzheimer

40 साल पुरानी शादी कैसे याद रहती है?
अब सवाल उठता है कि अगर याददाश्त कमजोर हो रही है तो पुरानी यादें क्यों बची रहती हैं?

डॉ. मनीष गुप्ता के अनुसार, कई पुरानी यादें लंबे समय से दिमाग में सेफ होती हैं. यानी 30-40 साल पहले हुई किसी घटना को याद रखने के लिए उस समय नई याददाश्त बन चुकी थी और वह लंबे समय की स्मृति का हिस्सा बन गई थी. इसलिए अल्जाइमर के शुरुआती चरण में व्यक्ति अपने बचपन, शादी, पुराने दोस्तों, पुराने घर या बचपन में सीखे गाने जैसी चीजें काफी अच्छी तरह याद कर सकता है, जबकि कुछ घंटे पहले हुई घटना भूल सकता है.

अल्जाइमर का शुरुआती संकेत सिर्फ भूलना नहीं है
हर भूलने की आदत को अल्जाइमर नहीं कहा जा सकता. उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभी नाम भूल जाना, चाबी या मोबाइल रखकर भूल जाना सामान्य हो सकता है. चिंता तब बढ़ती है जब भूलने की समस्या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे. जैसे-

  • एक ही सवाल या बात बार-बार पूछना

  • हाल में हुई घटनाओं को याद रखने में लगातार परेशानी

  • परिचित जगहों पर रास्ता भूल जाना

  • रोज किए जाने वाले कामों को करने में दिक्कत होना

  • किसी सामान्य रेसिपी या काम के तय चरणों को भूल जाना

  • व्यवहार या मूड में अचानक बदलाव

  • लोगों से मिलने-जुलने या बातचीत में रुचि कम होना

इनमें से कोई एक लक्षण होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को अल्जाइमर ही है. लेकिन अगर ऐसे बदलाव लगातार बढ़ रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

क्या अल्जाइमर को रोका जा सकता है?
अभी अल्जाइमर को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं है. लेकिन डॉक्टर के मुताबिक दिमाग को स्वस्थ रखने वाली जीवनशैली मददगार हो सकती है. नियमित एक्सरसाइज, अच्छी डाइट और दिमाग को एक्टिव रखने वाली गतिविधियां दिमाग की सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं. पढ़ना, नई चीजें सीखना, बातचीत करना, पहेलियां हल करना या किसी रचनात्मक गतिविधि में शामिल रहना मानसिक सक्रियता बनाए रखने में मदद कर सकता है.

क्या दवाओं से बीमारी की रफ्तार कम हो सकती है?
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, बीमारी की शुरुआती पहचान होने पर कुछ नई दवाएं उसके बढ़ने की रफ्तार को धीमा करने में मदद कर सकती हैं. इसलिए शुरुआती संकेतों को केवल उम्र के साथ भूलने की आदत मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है. समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से यह पता लगाया जा सकता है कि भूलने की वजह सामान्य उम्र से जुड़ा बदलाव है, किसी दूसरी बीमारी या दवा का असर है या अल्जाइमर जैसी स्थिति की शुरुआत.