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130th Constitutional Amendment Bill: PM-CM हों या कोई मंत्री... 30 दिन जेल में रहे तो जाएगी कुर्सी, संसद के मॉनसून सत्र में पेश हो सकता है ये बिल

केंद्र सरकार संसद के मॉनसून सत्र में एक ऐसा बिल पेश करने जा रही है, जिसके पास होने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री हों या कोई मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने पर पद से हटाना पड़ सकता है. यदि संबंधित व्यक्ति 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देता तो उसका पद अपने आप खत्म हो जाएगा. जी हां, हम 130वें संविधान संशोधन बिल के बारे में बात कर रहे हैं. यहां आप इस बिल के बारे में जान सकते हैं. 

Lok Sabha during the Special Session of Parliament (File Photo: PTI) Lok Sabha during the Special Session of Parliament (File Photo: PTI)

संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. इस मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार 130वां संशोधन विधेयक, 2025 को पेश कर सकती है. इस बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री हों या कोई मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने पर पद से हटाना पड़ सकता है. यदि संबंधित व्यक्ति 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देता तो उसका पद अपने आप खत्म हो जाएगा. 

आपको मालूम हो कि अभी तक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री के गिरफ्तार होने या जेल जाने पर इस्तीफा देने का कोई स्पष्ट नियम नहीं था. अरविंद केजरीवाल 156 दिन तिहाड़ जेल में रहते हुए भी दिल्ली के मुख्यमंत्री बने रहे. झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सीएम रहते जेल गए. तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी जेल में रहते हुए भी अपने पद पर बने रहे थे. 

JPC सौंप सकती है अपनी रिपोर्ट
आपको मालूम हो कि गृहमंत्री अमित शाह ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक, 2025 से जुड़े 3 बिलों (130वां संविधान संशोधन बिल 2025, गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज संशोधन बिल 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025) को संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में 20 अगस्त 2025 को पेश किया था. इसके बाद इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन कर उसके पास भेजा गया था. अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय JPC का गठन किया गया था. सूत्रों के मुताबिक JPC इस बिल से जुड़े प्रावधानों को हटाने के पक्ष में नहीं है. अब 130वें संविधान संशोधन विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति 17 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंप सकती है. इसके बाद इस बिल को सरकार संसद के मॉनसून सत्र में पेश करेगी.

सरकार क्यों ला रही यह बिल
130वें संविधान संशोधन विधेयक, 2025 का उद्देश्य संविधान के आर्टिकल 75, 164 और 239AA में बदलाव करना है. इस विधेयक के मुताबिक यदि पीएम, सीएम या कोई मंत्री किसी अपराध में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहता है, जिसकी अधिकतम सजा 5 साल या उससे अधिक है तो उसे पद छोड़ना होगा. इस बिल में यह भी कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति के रिहा होने के बाद उसके दोबारा नियुक्ति का रास्ता खुला रहेगा. सरकार ने इस बिल को लाने के उद्देश्य और कारणों में कहा है कि शासन व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने और संवैधानिक मर्यादा कायम रखने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है. सरकार का तर्क है कि गंभीर आपराधिक आरोपों में लंबे समय तक हिरासत में रहने वाला व्यक्ति मंत्री पद पर बना रहे, तो इससे सुशासन और सार्वजनिक विश्वास प्रभावित हो सकता है.

गिरफ्तार PM-CM और मंत्रियों को हटाने वाले 3 बिल
1. 130वां संविधान संशोधन बिल 2025: केंद्र और राज्य सरकारों के लिए
2. गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025: केंद्र शासित राज्यों के लिए
3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025: जम्मू-कश्मीर के लिए

क्या हैं तीनों बिल के प्रावधान
1. कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहते हुए पद पर नहीं रह सकता है.
2. PM, CM या मंत्री को गिरफ्तारी के 30 दिन के अंदर कोर्ट से जमानत लेनी होगी.
3. यदि 30 दिन में जमानत नहीं ले सके तो 31वें दिन उन्हें पद से हटा दिया जाएगा.
4. बाद में पीएम, सीएम या मंत्री को जमानत मिली तो वे अपने पद पर वापस आ सकते हैं.

क्या सिर्फ गिरफ्तारी होते ही छिन जाएगा पद 
यदि आप सोच रहे हैं कि सिर्फ गिरफ्तारी होने से पद छिन जाएगा तो ऐसा नहीं है. सिर्फ गिरफ्तारी से पद नहीं जाएगा. प्रस्तावित प्रावधान तभी लागू होगा जब व्यक्ति लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहे. यह सिर्फ उन मामलों में ही लागू होगा, जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है. छोटे अपराध इसके दायरे में नहीं होंगे.

विपक्ष क्यों जता रहा विरोध
इस प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दल विरोध जता रहे हैं. उनका कहना है कि सिर्फ गिरफ्तारी या हिरासत को आधार बनाकर किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पद से हटाना दोष सिद्ध होने तक निर्दोष के सिद्धांत के विपरीत हो सकता है. विपक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार कराया जा सकता है. यदि ऐसा हुआ तो चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने का खतरा पैदा हो सकता है.