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न लग्जरी कार, न सुरक्षा और न पहचान... 3300 करोड़ की संपत्ति वाले BJP विधायक क्यों बने भिखारी? हाथ में कटोरा लेकर सड़कों पर घूमते रहे पराग शाह

पराग शाह घाटकोपर से बीजेपी विधायक हैं और उनकी संपत्ति करीब 3300 करोड़ रुपये बताई जाती है. आमतौर पर वह सुरक्षा और लग्जरी गाड़ियों के साथ नजर आते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने जानबूझकर अपना पूरा हुलिया बदल लिया.

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महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले बीजेपी नेता पराग शाह जब घाटकोपर की सड़कों पर निकले तो उन्हें पहचानना मुश्किल था. न कोई सुरक्षा घेरा था, न लग्जरी गाड़ी और न ही महंगे कपड़े. चेहरे पर मेकअप और हाथ में भिक्षा का पात्र लिए वह आम भिखारी की तरह लोगों के बीच घूम रहे थे. खास बात यह रही कि इस दौरान दो लोगों ने उन्हें खाना भी खिलाया. बाद में जब उन्हें सच्चाई पता चली तो पराग शाह ने दोनों का सम्मान किया.

3300 करोड़ की संपत्ति, फिर क्यों बने भिखारी?
पराग शाह घाटकोपर से बीजेपी विधायक हैं और उनकी संपत्ति करीब 3300 करोड़ रुपये बताई जाती है. आमतौर पर वह सुरक्षा और लग्जरी गाड़ियों के साथ नजर आते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने जानबूझकर अपना पूरा हुलिया बदल लिया. दरअसल, जैन धर्म में चातुर्मास की शुरुआत होने वाली है. इसी दौरान पराग शाह के गुरु नम्रमुनि ने उन्हें एक दिन भिखारी बनकर जीवन को करीब से समझने की सलाह दी. गुरु की बात मानकर पराग शाह ने इस अनुभव को अपनाया और कुछ घंटों के लिए भिखारी का जीवन जिया.

मेकअप हटाकर उन्हीं लोगों के बीच पहुंचे
भिखारी के रूप में घाटकोपर की गलियों में घूमने के बाद पराग शाह ने अपना मेकअप उतारा और दोबारा उन्हीं जगहों पर पहुंचे. उन्होंने लोगों से बातचीत की और यह जानने की कोशिश की कि जब कोई व्यक्ति किसी को भिखारी समझता है तो उसके साथ कैसा व्यवहार करता है. पराग शाह ने बताया, 'मैं दो रातों से सो नहीं पाया हूं. बहुत अलग महसूस हो रहा है. मैं इसे शब्दों में नहीं बता सकता.'

दो लोगों ने खिलाया खाना, बाद में हुआ सम्मान
इस दौरान बबलू और मोहम्मद समद नाम के दो लोगों ने पराग शाह को आम भिखारी समझकर खाना खिलाया. दोनों को यह पता नहीं था कि उनके सामने महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायकों में से एक खड़ा है. बाद में पराग शाह ने दोनों लोगों से मुलाकात की और उनका सम्मान किया. उन्होंने कहा कि उस समय उनके सामने कोई अरबपति विधायक नहीं, बल्कि एक जरूरतमंद इंसान था.

पराग शाह का यह अनुभव सिर्फ भेष बदलने तक सीमित नहीं रहा. इसके जरिए उन्होंने समाज के उस वर्ग की जिंदगी और लोगों के व्यवहार को करीब से समझने की कोशिश की, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है.

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