8th Pay Commission
8th Pay Commission
8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हो गई हैं. सरकारी कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों का पिटारा खोल दिया है, जिसमें वेतन बढ़ोतरी से लेकर पेंशन व्यवस्था में बदलाव तक कई बड़े प्रस्ताव शामिल हैं. इन मांगों ने सरकार के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी है कि आखिर कितना संभव है और कितना नहीं. कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है, इसलिए वेतन भी उसी के अनुरूप बढ़ना चाहिए. उनका मानना है कि इससे एक संतुलित और न्यायसंगत व्यवस्था बनेगी.
न्यूनतम वेतन में इजाफे की मांग
कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम वेतन में भारी इजाफा है. शिक्षक संगठन प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच ने न्यूनतम वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 से 60,000 रुपये करने का सुझाव दिया है. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने और सालाना वेतन वृद्धि को 6 से 7 प्रतिशत तक करने की मांग भी उठाई गई है. कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई तेजी से बढ़ रही है, इसलिए वेतन में भी उसी हिसाब से वृद्धि जरूरी है. इसके अलावा महंगाई भत्ते को एक निश्चित स्तर पर मूल वेतन में जोड़ने की मांग भी की जा रही है.
सुविधाओं की मांग पर भी जोर
सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि भत्तों में भी बदलाव की मांग की जा रही है. हाउस रेंट अलाउंस बढ़ाने और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को न्यूनतम 9,000 रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है. नई मांगों में डिजिटल सपोर्ट अलाउंस भी शामिल है, जिसके तहत कर्मचारियों को हर महीने 2,000 रुपये दिए जाने की बात कही गई है. इसके अलावा अवकाश सुविधाओं में सुधार और रिटायरमेंट पर लीव एनकैशमेंट की सीमा बढ़ाने की भी मांग है. बच्चों की शिक्षा के बढ़ते खर्च को देखते हुए चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है.
पुरानी पेंशन योजना की वापसी की मांग
सबसे विवादित और महत्वपूर्ण मांग पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की है. कई कर्मचारी संगठन मानते हैं कि मौजूदा पेंशन प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है. इसके साथ ही ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने, समूह बीमा को बेहतर बनाने और पदोन्नति प्रक्रिया को तेज करने की मांग भी की गई है.
चार गुना वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने एक और बड़ा प्रस्ताव रखा है. इसके तहत न्यूनतम वेतन को चार गुना बढ़ाकर 72,000 रुपये करने की बात कही गई है. साथ ही उच्च पदों के लिए अधिकतम वेतन 10 लाख रुपये तक करने का सुझाव दिया गया है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो सभी स्तरों पर वेतन में भारी वृद्धि देखने को मिल सकती है.
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