अघोरी गैंग का भंडाफोड़
अघोरी गैंग का भंडाफोड़
महाराष्ट्र में भोंदू बाबाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच चंद्रपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. सावली तहसील के चिंचडोह बैराज इलाके में अघोरी पूजा और तंत्र-मंत्र के नाम पर चल रहे एक गंभीर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है.
गुप्त धन के लालच में महिलाओं को बनाया निशाना
जांच में सामने आया है कि पिछले दो वर्षों से गुप्त धन दिलाने और अचानक अमीर बनाने का झांसा देकर विधवा और अविवाहित युवतियों का इस्तेमाल किया जा रहा था. इन महिलाओं को कथित अघोरी अनुष्ठानों में शामिल किया जाता था, जो अकसर आधी रात को सुनसान जगहों और श्मशान घाटों पर किए जाते थे. इन विधियों में कछुओं और उल्लू की बलि दिए जाने की भी बात सामने आई है.
कछुआ तस्करी से खुला पूरा मामला
इस पूरे मामले का खुलासा 12 अप्रैल को उस समय हुआ, जब वन विभाग ने कछुओं की तस्करी के आरोप में 6 लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों में गंगाधर बुरांडे, मोरेश्वर देवतले, ओम शिंदे, हेमचंद शेंडे, धवल वेळादी और राजेंद्र दिवसे शामिल हैं.
मोबाइल जांच में मिले चौंकाने वाले सबूत
आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई डरावने वीडियो और फोटो मिले हैं. इनमें श्मशान में किए गए तांत्रिक अनुष्ठानों की रिकॉर्डिंग, कछुओं और उल्लुओं की तस्वीरें, साथ ही कई युवतियों और विधवा महिलाओं की निजी जानकारी, फोटो, जन्म कुंडलियां और मासिक पाली की तारीखें भी बरामद हुई हैं.
ग्रामीण इलाकों तक फैला था नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का नेटवर्क चंद्रपुर और गडचिरोली के ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला हुआ था. करीब 50 बिचौलिए इस रैकेट में सक्रिय बताए जा रहे हैं, जो महिलाओं की जानकारी जुटाकर मुख्य तांत्रिक तक पहुंचाते थे. इसके बाद श्मशान और सुनसान इलाकों में अघोरी विधियां कराई जाती थीं.
मास्टरमाइंड अब भी फरार
फिलहाल 6 आरोपी वन विभाग की हिरासत में हैं, जबकि इस पूरे रैकेट का मुख्य तांत्रिक और उसका सहयोगी अब भी फरार है. वन विभाग ने 17 अन्य लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है. RFO विनोद धुर्वे के मुताबिक, मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आई है और मुख्य आरोपी की तलाश जारी है.
(रिपोर्ट- विकास राजूरकर)
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