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Jamila Khatun Converts To Sanatan Dharma: 'हिंदू धर्म में मिलता है महिलाओं को सम्मान'... बोली मुस्लिम से हिंदू बनी ज्योति देवी, शिव पूजा करने पर मार-पीट करता था पूर्व पति, रचाई दूसरी शादी

बोकारो की रहने वाली जमीला खातून जो भगवान शिव की भक्त भी हैं, उन्होंने सनातन धर्म अपनाकर अपना नाम ज्योति देवी रखा और बरेली में प्रकाश रविदास से हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली है. ज्योति देवी का आरोप है कि भगवान शिव की पूजा करने पर पूर्व पति उनके साथ मारपीट करता था और तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में महिलाओं को सम्मान मिलता है.

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हिंदू बनकर रचाई दूसरी शादी... शिव पूजा करने पर मारता था पूर्व पति हिंदू बनकर रचाई दूसरी शादी... शिव पूजा करने पर मारता था पूर्व पति

उत्तर प्रदेश के बरेली में अनोखी शादी देखने को मिली. झारखंड के बोकारो जिले की 18 वर्षीय जमीला खातून ने सनातन धर्म अपनाकर अपना नाम ज्योति देवी रख लिया. पीड़िता का कहना है कि वह शुरुआत से ही भगवान शंकर में आस्था रखती थी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करती थी. इसी बात से परेशान होकर उसके शौहर ने तीन तलाक देकर उसे घर से निकाल दिया. इसके बाद उसने हजारीबाग निवासी 22 वर्षीय प्रकाश रविदास के साथ बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया. आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया. जमीला का कहना है कि उसने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है, सनातन धर्म को अपना लिया है और अपना नाम भी बदल लिया है.

इस्लाम में रहते हुए करती थी शिव आराधना
जमीला खातून ग्राम लोधी नीचा टोला, बोकारो की रहने वाली बताई गई हैं. उनका कहना है कि उनकी भगवान शिव में गहरी आस्था रही है और वह पहले से ही भगवान शिव की पूजा-अर्चना किया करती थीं. जमीला का आरोप है कि जब उनके पहले शौहर और ससुराल वालों को उनके पूजा-पाठ करने की जानकारी हुई तो उनके साथ कथित रूप से मारपीट और प्रताड़ना शुरू कर दी गई और एक दिन तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. जमीला के मुताबिक, उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना छोड़ने से इनकार कर दिया. इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

बुर्के से होती थी घुटन
जमीला का दावा है कि बाद में उनके पहले शौहर ने उन्हें तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. वह परेशान रहने लगीं और उन्हें कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था. इसके बाद वह खुद को बेसहारा महसूस करने लगीं. जमीला ने कहा कि उन्हें धार्मिक जीवन को लेकर लगातार दबाव महसूस होता था. उन्होंने आगे कहा कि बुर्के में उन्हें घुटन महसूस होती थी और भगवान शिव की भक्ति से उन्हें मानसिक शांति मिलती थी. इसी दौरान हजारीबाग जिले के चानो ऊंचाघाना निवासी जगदेव रविदास के पुत्र प्रकाश रविदास से उनकी बातचीत शुरू हुई. बातचीत धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई. दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया.

बरेली के आश्रम में हुआ विवाह
स्थानीय स्तर पर विरोध और पारिवारिक अड़चनों की आशंका को देखते हुए दोनों झारखंड से बरेली पहुंचे. यहां उन्होंने अगस्त्य मुनि आश्रम के आचार्य के.के. शंखधार से संपर्क किया. इसके बाद आश्रम में दोनों का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया गया.

आश्रम में धार्मिक प्रक्रिया के बाद जमीला ने अपना नाम ज्योति देवी रखा
अगस्त्य मुनि आश्रम में जमीला की ओर से सनातन धर्म अपनाने की इच्छा जताई गई. आश्रम की ओर से सनातन परंपरा के अनुसार शुद्धिकरण और दीक्षा की प्रक्रिया कराई गई. इसमें गंगाजल और गोमूत्र से आचमन कराया गया तथा संकल्प दिलाया गया. इसके बाद गायत्री मंत्र का जाप कराया गया और सनातन धर्म की दीक्षा दी गई.

इस मामले में जानकारी देते हुए मंदिर के महंत शंखधर का कहना है कि धार्मिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीला खातून का नया नाम ज्योति देवी रखा गया. इसके बाद आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रकाश रविदास और ज्योति देवी का विवाह कराया गया.

जमीला ने खुद कबूली बात
उन्होंने कहा 'पहले हमारा नाम जमीला था, अब ज्योति देवी रख लिया है. हिंदू धर्म में तीन तलाक नहीं होता, महिलाओं को सम्मान मिलता है. यहां पर महिलाओं को इज्जत मिलती है, देवी के समान मानते हैं. अपनी मर्जी से हिंदू धर्म को स्वीकार किया है, कोई दबाव नहीं है, कोई लालच नहीं है. हिंदू धर्म में शुरुआत से आस्था थी. निकाह हो चुका था, उसने तीन तलाक दे दिया. हम भगवान शंकर की पूजा करते थे, इसलिए तीन तलाक दे दिया. मुझे मारता था, पिटाई करता था. अब बहुत अच्छा लग रहा है. इस्लाम में महिलाओं की कोई इज्जत नहीं है.' 
 

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