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Double Engine Government in Bengal: बंगाल में 'डबल इंजन' की सरकार, अब बहेगी विकास की बयार, रुकी केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा करने की कवायद शुरू

पिछले एक दशक में केंद्र और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के बीच कई योजनाओं को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला. कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं की गईं. अब बंगाल में बीजेपी की सरकार आ गई है. ऐसे में केंद्र सरकार  रुकी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है.

BJP Government in Bengal BJP Government in Bengal

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बंपर जीत दर्ज की है. केंद्र में पहले से ही बीजेपी की सरकार है अब बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई है. ऐसे डबल इंजन की सरकार से विकास को और गति मिलने की उम्मीद है. चुनाव परिणाम सामने आते ही केंद्र सरकार ने बंगाल में वर्षों से अटकी केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन योजनाओं और परियोजनाओं की सूची मांगी है, जो पिछले लगभग 12 वर्षों से ममता बनर्जी सरकार के विरोध, देरी या प्रशासनिक अड़चनों के कारण लंबित पड़ी थीं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई है बड़ी जिम्मेदारी
सूत्रों का कहना है कि इस पूरी कवायद की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सौंपी गई है. उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों से ऐसी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है, जिनका क्रियान्वयन पश्चिम बंगाल में बाधित रहा. मंत्रालयों ने संबंधित सूचनाएं भेजना भी शुरू कर दिया है. केंद्र सरकार का उद्देश्य नई सरकार के गठन के तुरंत बाद इन परियोजनाओं के रास्ते की बाधाएं दूर कर तेज गति से काम शुरू करना है. पिछले एक दशक में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच कई योजनाओं को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला. कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं की गईं या फिर उनके नाम बदलकर लागू किया गया. कई परियोजनाओं को जमीन आवंटन, प्रशासनिक अनुमति या अन्य कारणों से लंबे समय तक रोके रखा गया. अब केंद्र सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है.

आयुष्मान भारत योजना को मिलेगी मंजूरी 
सबसे प्रमुख योजना आयुष्मान भारत है जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू करने से इनकार कर दिया था. इस योजना के तहत पात्र परिवारों को पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा मिलता है. ममता बनर्जी सरकार का कहना था कि राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना बेहतर है और केंद्र की 60:40 फंडिंग व्यवस्था तथा प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले स्वरूप पर भी उसे आपत्ति थी. पीएम मोदी पहलें ही कह चुके हैं कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना 
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर भी लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. ममता सरकार अपनी ‘कृषक बंधु’ योजना को प्राथमिकता देती रही. हालांकि बाद में इसे आंशिक रूप से लागू किया गया, लेकिन लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर खींचतान जारी रही. अब केंद्र सरकार इसे पूरी क्षमता के साथ लागू कराने की तैयारी में है.

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी
इसी तरह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट यानी मनरेगा के फंड को कथित अनियमितताओं के कारण केंद्र ने रोक दिया था. इसे लेकर राज्य सरकार ने केंद्र पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाया था. अब केंद्र इसे नए ढांचे के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है.

इन योजनाओं पर भी जोर 
प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) का नाम बदलकर ‘बांग्ला आवास योजना’ किए जाने और उसमें कथित अनियमितताओं के बाद 2022 से फंडिंग रुकी हुई थी. अब इस योजना को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है. केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पश्चिम बंगाल में काफी देर से लागू किया गया और आवंटित राशि का सीमित उपयोग हुआ. वहीं जल जीवन मिशन के तहत आवंटित फंड के बेहतर उपयोग और प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया जाएगा. शिक्षा क्षेत्र में पीएम श्री स्कूल नई शिक्षा एवं भाषा नीति और ‘उल्लास’ जैसी योजनाओं को लागू करने की तैयारी है. साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रुकी परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलने की संभावना है.

इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की तैयारी 
नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत गंगा सफाई से जुड़े कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भूमि उपलब्ध न होने के कारण वर्षों से लंबित हैं. केंद्र सरकार कई बार संसद में यह मुद्दा उठा चुकी है कि पश्चिम बंगाल में जमीन नहीं मिलने से परियोजनाओं में देरी हुई. अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की तैयारी है. इसी तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संवेदनशील क्षेत्रों में बॉर्डर फेंसिंग को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. केंद्र का आरोप था कि आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई. अब इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है.

...ताकि अधिक से अधिक लोगों को मिले लाभ
प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना को छोड़कर पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी ‘बांग्ला शस्य बीमा’ योजना शुरू की थी. राज्य सरकार का तर्क था कि उसका मॉडल किसानों के लिए अधिक लाभकारी है, जबकि केंद्र ने इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बताया. मृदा स्वास्थ्य कार्ड और पीएम-प्रणाम जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन की गति को लेकर भी केंद्र ने राज्य सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया. केंद्र सरकार की रणनीति साफ है कि लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा कर जमीन पर ‘डबल इंजन सरकार’ का असर दिखाया जाए. साथ ही केंद्रीय योजनाओं का दायरा बढ़ाकर लाभार्थियों की संख्या में विस्तार किया जाए ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे.

(हिमांशु मिश्रा की रिपोर्ट)