West Bengal New CM Suvendu Adhikari
West Bengal New CM Suvendu Adhikari
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन बेहद खास है. जी हां, राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने वाली है. बंगाल में 15 सालों के बाद सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है. भवानीपुर विधानसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी 9 मई को सुबह 11:00 बजे बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम का ऐलान किया है.
ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं शुभेंदु अधिकारी? शुभेंदु ने कांग्रेस से सियासी करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद कांग्रेस को छोड़ ममता बनर्जी के बेहद करीबी बन गए. फिर बीजेपी से जुड़ बंगाल की सत्ता पर दशकों से ज्यादा समय तक राज करने वाली ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता से बाहर कर दिया है. आपको मालूम हो कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी ने 207 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की है तो वहीं टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमटकर रह गई है.
कौन हैं शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर में हुआ था. शुभेंदु को राजनीति विरासत में मिली है. शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके थे. आपको मालूम हो कि शुभेंदु अधिकारी परिवार दशकों से मेदिनीपुर की राजनीति पर अपनी पकड़ बनाए हुए है. शिशिर अधिकारी बंगाल विधानसभा और लोकसभा दोनों में सदस्य रहे थे. उनके भाई दिब्येंदु अधिकारी 2024 में BJP में शामिल होने से पहले टीएमसी के सांसद थे.
कांग्रेस से जुड़ शुरू की थी राजनीतिक यात्रा
शुभेंदु अधिकारी ने कांथी मॉडल स्कूल से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की. फिर उन्होंने कांथी के पीके कॉलेज से स्नातक किया और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में भी समय बिताया. शुभेंदु अधिकारी अपने कॉलेज के दिनों से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे. राजनीतिक भागदौड़ के बीच शुभेंदु ने नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की. 1989 में छात्र राजनीति से एंट्री करने वाले शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस की छात्र इकाई से राजनीतिक सफर शुरू किया था. शुभेंदु अधिकारी ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1995 के नगरपालिका चुनावों के दौरान कांग्रेस के साथ शुरू की थी. वह कांथी नगर पालिका के पार्षद बने थे. उस समय अधिकारी परिवार कांग्रेस के साथ जुड़ा हुआ था. इसके बाद कांग्रेस से अलग होकर जब ममता बनर्जी ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस बनाई, तब अधिकारी परिवार TMC के साथ आ गया. शुभेंदु अधिकारी भी बिना देर किए टीएमसी में शामिल हो गए. शुभेंदु अधिकारी धीरे-धीरे ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद करीबी बन गए.
ममता सरकार में नंबर दो की रखते थे हैसियत
शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान उभरा. उस समय वह विधायक थे और उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व किया. इसी आंदोलन ने बंगाल में 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार की नींव हिला दी थी और 2011 में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. शुभेंदु अधिकारी पहली बार लोकसभा चुनाव 2009 में तामलुक सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए थे. उन्होंने सीपीएम के दिग्गज नेता लक्ष्मण सेठ को 1.73 लाख वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उसी सीट से अपनी सांसद की सीट बरकरार रखी थी. फिर शुभेंदु अधिकारी साल 2016 में राज्य की राजनीति में लौट आए. विधानसभा चुनाव 2016 में नंदीग्राम से जीतकर वह परिवहन मंत्री बने और ममता सरकार में नंबर दो की हैसियत हासिल कर ली. उस समय तक शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी का दाहिना हाथ बन चुके थे और सरकार के सबसे प्रभावशाली चेहरे में शुमार हो गए थे. हालांकि शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक भविष्य कही और लिखा था. 2019 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी की हार के बाद चीजें बदलनी शुरू हुई. प्रशांत किशोर की एंट्री और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का बढ़ता वर्चस्व शुभेंदु को रास नहीं आया.
...और छोड़ दिया ममता का साथ
टीएमसी में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के चलते राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी कि पार्टी के भीतर शुभेंदु का कद कम किया जा रहा है. आखिरकार शुभेंदु ने नवंबर 2020 में परिवहन और सिंचाई मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. वह ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का साथ छोड़कर 2020 में भाजपा के साथ जुड़ गए. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुभेंदु का टीएमसी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना गया. 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम में ममता को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. 5 साल बाद एक जोरदार बहस का विषय बन गया क्या शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को उनके अपने गढ़ भवानीपुर में हरा सकते हैं. विधानसभा चुनाव 2026 में इस सवाल का जवाब मिल गया. शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15105 वोटों के अंतर से हराया. इतना ही नहीं उन्होंने अपनी दूसरी सीट नंदीग्राम में टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर को 9665 वोटों के अंतर से हराया.
बंगाल में BJP का पहले मुख्यमंत्री
आज के समय में शुभेंदु अधिकारी बंगाल भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे हैं. जमीनी स्तर पर गहरी पकड़, संगठनात्मक क्षमता, विरोधी को घेरने की रणनीति और पढ़े-लिखे नेता का छवि, इन सबके साथ वे बंगाल की बदलती राजनीति के सबसे बड़े प्रतीक बन चुके हैं और अब बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. 9 मई 2026 को 57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ इतिहास रच देंगे.