Bhilai Garba Mahotsav
Bhilai Garba Mahotsav
छत्तीसगढ़ के भिलाई में इस बार गरबा सिर्फ भक्ति और नृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया जा रहा. शारदीय नवरात्रि के मौके पर गुजराती समाज सेक्टर-04 ने एक अनूठी पहल की. समाज की महिलाओं और पुरुषों ने पहली बार हाथों में पौधे लेकर गरबा किया और लोगों को प्रकृति की देखभाल के लिए प्रेरित किया. आयोजन में शामिल होने वाले लोगों को पौधे भी दिए गए, ताकि वे इन्हें लगाकर हरियाली बढ़ाने में योगदान दे सकें. समाज का मानना है कि मां दुर्गा की आराधना के साथ प्रकृति की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है.
गरबा के साथ पर्यावरण संरक्षण की पहल
शारदीय नवरात्रि के दौरान देशभर में मां दुर्गा की भक्ति और आराधना की जा रही है. मंदिरों से लेकर गरबा पंडालों तक उत्सव का माहौल है. इसी बीच भिलाई के गुजराती समाज सेक्टर-04 ने अपने रास-गरबा और डांडिया उत्सव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर एक नई पहल की है. इस बार आयोजन में शामिल होने वाली महिलाओं और पुरुषों को समिति की ओर से एक-एक पौधा उपहार में दिया जा रहा है. समाज के सदस्यों ने हाथों में पौधे लेकर डांडिया और गरबा किया. इस पहल के जरिए लोगों को पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का संदेश दिया गया. गुजराती समाज सेक्टर-04 का मानना है कि मां दुर्गा प्रकृति की जननी हैं. ऐसे में प्रकृति को हरा-भरा रखना भी उनकी आराधना का हिस्सा है. समाज के लोगों से अपील की जा रही है कि वे पौधे लगाने के साथ उनका एक बच्चे की तरह लालन-पालन भी करें.
आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण देने का उद्देश्य
समाज की सदस्य ज्योति दवे ने बताया कि हर साल गरबा मनाया जाता है, लेकिन इस बार इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ पर्यावरण देना है. उन्होंने कहा कि मां शक्ति की आराधना के साथ प्रकृति शक्ति को मजबूत करने की भी जरूरत है. इस पहल से भिलाई की माताएं और बहनें काफी खुश हैं.
गुजराती समाज सेक्टर-04 की सदस्य निशा ठक्कर ने बताया कि भिलाई के सेक्टर-04 में सबसे पहले गरबा शुरू हुआ था और समाज इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है. इस बार पहली बार पौधे हाथों में लेकर गरबा करने के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया है. इन पौधों को लोगों के बीच बांटा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जा सकें. उन्होंने कहा कि आज पेड़ काटे जा रहे हैं और बड़ी-बड़ी इमारतें बनाई जा रही हैं. इससे बच्चों को अच्छा वातावरण नहीं मिल पा रहा है. इसी चिंता को देखते हुए समाज ने पर्यावरण संरक्षण के लिए यह पहल शुरू की है. निशा ठक्कर के मुताबिक, प्रकृति को बचाना हमारा धर्म भी है और कर्तव्य भी.
मनोरंजन के साथ भक्ति और प्रकृति से जुड़ने की कोशिश
निशा ठक्कर ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पहले हरियाली थी, लेकिन अब वह लगातार कम होती जा रही है. इसे बढ़ाने के उद्देश्य से समाज की महिलाओं ने पहली बार हाथों में पौधे लेकर गरबा किया और मां की आराधना की. उन्होंने कहा कि नवरात्रि के नौ दिनों में गरबा और मां की भक्ति की जाती है, लेकिन कई लोग इसे केवल मनोरंजन और नाच-गाने के तौर पर देखते हैं. इस बार समाज ने गरबा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की है. पौधे लेकर मां दुर्गा की आराधना करने का अनुभव समाज के सदस्यों के लिए खास रहा.
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