पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
बिजनौर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. दरअसल बिजनौर में चांदपुर के गांव मंसूरपुर का रहने वाला सुमित शर्मा बाजार स्थित कपूर मेडिकल पर नौकरी करता था. वह दिन भर काम करने के बाद मेडिकल के पैसे के कलेक्शन के लिए भी आसपास की दुकानों पर जाता था.
14 सितंबर को उसने रात को लगभग 8:30 बजे पुलिस को सूचना दी कि जब वह मेडिकल बंद करने के बाद और कलेक्शन और दुकान का पैसा लेकर अपने गांव मंसूरपुर जा रहा था. उसी दौरान रास्ते में तीन अज्ञात बाइक सवार लोगों ने उसे रोक लिया और उसकी पिटाई करते हुए उसके पास से रुपयो से भरा बैग छीन लिया.
जिसमें ₹1,04,000 मौजूद थे. इसमें दुकान के पैसे, कलेक्शन का पैसा और इसके अलावा वो पैसा भी था जिसे वह जमा करने के लिए घर से लाया था. लूट की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और सुमित गांव के लोगों के साथ थाने भी पहुंचा. मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद जब मामले की जांच की तो लूट का मामला फर्जी निकला.
पुलिस को पहले से ही सुमिल पर शक था. इसकी वजह थी वह वह बार-बार बयान बदल रहा था. साथ ही पुलिस ने सुमित द्वारा बताए गए रास्ते पर लगे कैसे सीसीटीवी कैमरों को चेक किया और उसका नंबर भी सर्विलांस पर डाला. जिसके बाद पूरी घटना का खुलासा हो गया.
दरअसल जो रास्ता उसने बताया था वहां कहीं भी दूर तक तीन लोग नहीं दिखाई दिए. पुलिस ने जब आसपास के जन सेवा केंद्र चेक किए तो एक जन सेवा केंद्र पर सुमित पैसे जमा करते हुए सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दिया था. पुलिस ने उसके सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लेकर जब सुमित से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने पूरी घटना का खुलासा कर दिया.
एसपीके के बिश्नोई के अनुसार सुमित ने पूछताछ में बताया की उसको ऑनलाइन एविएटर गेम खेलने की आदत है. वह इस गेम में अब तक चार लाख से ज्यादा रुपया हार चुका था. अब उसकी समझ नहीं आ रहा था कि वह इस पैसे की भरपाई कैसे करेगा. जिसके लिए उसने लूट की मनगढ़ंत कहानी रची. उसपर कर्जा था, इस बार का परिवार को भी नहीं पता था. इसलिए उसने ऐसी कहानी रची.
जिस घटना के बारे में उसने पुलिस को बताया, उसे सच दिखाने के लिए उसने घर जाते समय वारदात की जगह कुछ हरकत की. उसने जिस तिराहे के पास की लूट की घटना दिखाई, वहीं पर सांकेतिक निशान बताने वाली पट्टिका के पीछे झाड़ियां में दुकान से उठाए गए 40 हजार 200 रूपए और अपना मोबाइल इस पट्टिका के पीछे छुपा दिया और पुलिस को झूठी लूट की सूचना दे दी. पूरे मामले की जांच करने के बाद पुलिस ने उसके निशानदेही पर यह रुपए और उसका मोबाइल इस पट्टीका की झाड़ियां से बरामद कर लिया. जिसके बाद लूट की झूठी कहानी का पर्दाफाश करते हुए झूठी कहानी रचना के आरोप में उसे अब गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया है.