AI made image
AI made image
जानकारी के मुताबिक, एक बालिका बच्ची ने Childline India Foundation की हेल्पलाइन पर फोन कर बताया कि उसके माता-पिता उसकी शादी झालावाड़ निवासी एक युवक से 26 अप्रैल को कराने जा रहे हैं. बालिका ने साफ कहा कि वह इस शादी के लिए तैयार नहीं है. उसने यह भी बताया कि जब उसने इसका विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई. यह कॉल मिलते ही मामला गंभीर मानते हुए संबंधित विभाग तुरंत सक्रिय हो गए. इसके बाद फाउंडेशन ने बिना देर किए और लापरवाही के वहां पहुंची और नाबालिग की मदद की.
प्रशासनिक टीम तुरंत हुई अलर्ट
सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल अधिकारिता विभाग और सृष्टि सेवा समिति की टीम तुरंत अलर्ट मोड में आ गई. इसी बीच बालिका ने दोबारा फोन कर बताया कि वह घर से निकलकर डीसीएम रोड पर खड़ी है और मदद का इंतजार कर रही है. टीम ने बिना देर किए मौके पर पहुंचकर बालिका को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया. अधिकारियों ने सबसे पहले उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की और फिर पूरे मामले की जानकारी विस्तार से ली.
टीम ने मौके पर पहुंचकर संभाला मामला
कार्रवाई के तहत काउंसलर महिमा पांचाल, सुपरवाइजर बंटी सुमन, केस वर्कर आकाश कुमार और जिला समन्वयक भूपेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे. टीम ने बालिका को मानसिक रूप से संभाला और उसकी पूरी बात सुनी. इसके बाद मामले को आगे बढ़ाते हुए उद्योग नगर थाने में इसकी सूचना दर्ज कराई गई, ताकि कानूनी प्रक्रिया भी समय पर पूरी हो सके.
बाल कल्याण समिति के सामने पेश
बालिका को आगे की कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया. यहां उसकी काउंसलिंग की गई और उसकी स्थिति को समझते हुए फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर उसे राजकीय बालिका गृह में अस्थायी आश्रय दिया गया है. यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि बालिका सुरक्षित माहौल में रह सके और उस पर किसी तरह का दबाव न बनाया जा सके.
प्रशासन का सख्त संदेश
प्रशासन ने साफ कहा है कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. कोटा की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि जागरूकता, हिम्मत और सही समय पर मदद मांगना किसी भी मुश्किल परिस्थिति को बदल सकता है.
(रिपोर्ट- चेतन गुर्जर)
ये भी पढ़ें