धनवाद में नवजात कन्याओं का देवी के रूप में हुआ स्वागत
धनवाद में नवजात कन्याओं का देवी के रूप में हुआ स्वागत
नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के बीच धनबाद में बेटियों के जन्मोत्सव की एक अनूठी पहल देखने को मिली. यहां खुशियों की उड़ान संस्था की महिलाओं ने कोयलांचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) में 51 नवजात कन्याओं का पूजन कर उनका स्वागत किया. बच्चियों को वस्त्र, मिठाइयां और चुनरी भेंट की गईं. इस पहल के जरिए समाज को संदेश दिया गया कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की अनमोल धरोहर हैं.
51 नवजात कन्याओं का पूजन कर मनाया जन्मोत्सव
नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना के साथ नन्हीं बच्चियों के आगमन की खुशियां मनाई गईं. धनबाद के SNMMCH में संस्था की महिलाओं ने नवजात कन्याओं का विधि-विधान से पूजन किया. बच्चियों को वस्त्र और मिठाइयां भेंट की गईं, वहीं उनके सिर पर चुनरी ओढ़ाकर स्नेह और सम्मान के साथ स्वागत किया गया. इस मौके पर मौजूद सदस्यों ने बच्चियों के स्वस्थ जीवन, सुखद भविष्य और उज्ज्वल कल की कामना की. महिला समिति की सदस्य सरिता सिंह ने बताया कि पवित्र शारदीय नवरात्र चल रहा है. इसी को लेकर SNMMCH में पिछले छह दिनों के दौरान जितनी भी बच्चियों का जन्म हुआ, उन सभी कन्याओं का विधि-विधान से पूजन किया गया.
'कन्या मां शक्ति का रूप, बच्ची वरदान है'
महिला समिति की सदस्य निहारिका सिंह ने कहा कि सनातन परंपरा में कन्या को मां शक्ति का रूप माना जाता है. सभी कन्याओं के पूजन के बाद महिला सदस्यों ने उनका आशीर्वाद लिया. इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि बच्ची का जन्म वरदान है. उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग परिवार में बच्ची के जन्म होने पर उसे हीन नजर से देखते हैं. पिछले दिनों SNMMCH में जुड़वा बच्चियों का जन्म हुआ था, जिन्हें छोड़कर उनके परिजन भाग गए थे. ऐसे लोगों की मानसिकता बदलने के लिए यह पहल की गई है.
बेटा-बेटी में फर्क नहीं, परवरिश और शिक्षा के समान अवसर जरूरी
निहारिका सिंह ने कहा कि लड़का और लड़की में कोई फर्क नहीं है. अगर लड़कियों की सही तरीके से परवरिश की जाए और उन्हें शिक्षा दी जाए, तो वे भी अपने परिजनों और परिवार का सिर ऊंचा कर सकती हैं. वे अपने परिवार को गर्व महसूस कराने का काम कर सकती हैं. इस पहल का मकसद केवल नवजात कन्याओं का पूजन करना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना भी है. बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और उत्सव का अवसर है, जितना किसी अन्य बच्चे का जन्म. बेटियों को सम्मान देना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें शिक्षा व जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.
त्योहारों तक सीमित न रहे बेटियों के सम्मान का संदेश
नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है. ऐसे में नवजात कन्याओं का सम्मान इस पर्व के सामाजिक संदेश को भी मजबूती देता है. जरूरत इस बात की है कि बेटियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना केवल त्योहारों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की सोच और व्यवहार का हिस्सा बने. धनबाद में खुशियों की उड़ान संस्था की महिलाओं की यह पहल बेटियों के जन्म का स्वागत करने और उन्हें सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने का संदेश देती है.
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