Chaitra Navratri
Chaitra Navratri
छत्तीसगढ़ की जेलों में इस बार चैत्र नवरात्रि का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आत्मशुद्धि, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरण का एक प्रेरणादायक अवसर बनकर उभरा है. प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंदियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे वे भक्ति और साधना के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें.
इसी क्रम में दुर्ग केंद्रीय जेल में आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. जेल की चारदीवारी के भीतर कैदियों ने भक्ति और आत्मचिंतन के जरिए पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है. यहां कुल 198 बंदियों ने व्रत रखा है, जिनमें 159 पुरुष और 39 महिला बंदी शामिल हैं. सभी ने पूरे नौ दिनों तक उपवास रखकर माता रानी की आराधना में खुद को समर्पित किया है.
भजन-कीर्तन से गूंजा जेल परिसर
नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम होने वाले भजन-कीर्तन, जस गीत और माता रानी की पूजा से जेल परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो गया है. ज्योत-जवारे की स्थापना और नियमित आरती से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है. बंदी पूरे अनुशासन के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं, जिससे उनके भीतर आत्मसंयम और धैर्य की भावना विकसित हो रही है.
बंदियों के लिए विशेष सुविधाएं और स्वास्थ्य देखभाल
बंदियों की आस्था को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं. व्रत रखने वाले बंदियों के लिए फल, दूध, मेवे और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उनके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े. इसके साथ ही डॉक्टरों की टीम द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है. जेल अधीक्षक मनीष सम्भाकर ने बताया कि सभी बंदी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं. सुबह आरती के बाद जस गीत गाए जाते हैं, जिससे आध्यात्मिक माहौल और अधिक सशक्त हो जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि सभी उपवास रखने वाले बंदियों का नियमित मेडिकल चेकअप सुनिश्चित किया जा रहा है.
सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ते कदम
इस तरह के धार्मिक आयोजन बंदियों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. यह उन्हें आत्म संयम, धैर्य और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है. दुर्ग केंद्रीय जेल की यह पहल न केवल सुधारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है.
रिपोर्टर: रघुनंदन पांडा
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