El Nino Warning
El Nino Warning
मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने की तैयारी में है. दुनियाभर के वैज्ञानिक जिस अल-नीनो (El Niño) को लेकर पिछले कई महीनों से चेतावनी दे रहे थे, अब उसके असर के संकेत और मजबूत होते दिख रहे हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का कहना है कि आने वाले महीनों में अल-नीनो तेजी से मजबूत हो सकता है. इसका असर सिर्फ तापमान पर ही नहीं, बल्कि बारिश, सूखा, खेती और कई देशों के मौसम पर भी देखने को मिल सकता है.
क्या है अल-नीनो?
अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना (Climate Pattern) है, जो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के मध्य और पूर्वी हिस्से के समुद्री जल के सामान्य से अधिक गर्म होने पर बनती है. समुद्र का यह बढ़ा हुआ तापमान दुनिया भर के मौसम के पैटर्न को प्रभावित करता है. इसकी वजह से कहीं भीषण गर्मी पड़ती है, कहीं सूखा और कहीं सामान्य से अधिक बारिश या बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है.
WMO ने क्यों जारी की चेतावनी?
WMO के मुताबिक, जुलाई से अगस्त 2026 के दौरान अल-नीनो बनने की संभावना 80 प्रतिशत थी, जबकि सितंबर के बाद इसके बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है. कई वैश्विक मॉडल यह भी संकेत दे रहे हैं कि यह मध्यम से लेकर मजबूत रूप ले सकता है. ऐसी स्थिति में दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान, हीटवेव, अनियमित बारिश और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं.
भारत पर कैसा होगा असर?
भारत में अल-नीनो का सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ सकता है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इसके कारण कई इलाकों में बारिश सामान्य से कम या अनियमित हो सकती है. इससे खरीफ फसलों, जलाशयों और कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका रहती है. वहीं कई राज्यों में सामान्य से अधिक गर्मी और उमस भी महसूस हो सकती है. हालांकि इसका प्रभाव पूरे देश में एक जैसा नहीं होता और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.
दुनिया के किन हिस्सों पर पड़ेगा असर?
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो के मजबूत होने पर कई देशों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है. कुछ क्षेत्रों में लंबे सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ जगहों पर अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा जंगलों में आग, समुद्री तापमान में बढ़ोतरी और खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है.
गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि अल-नीनो का पूरा असर आने वाले महीनों में दिखाई देगा. इसके कारण वैश्विक तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है और 2026 के अंत तक कई इलाकों में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो और मानवजनित जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मिलकर मौसम को और अधिक चरम पर ले जा सकते हैं.
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