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कौन अधिकारी किस टेबल पर होगा बैठा.. किस तरह हुई उसकी नियुक्ति, जानें मतगणना के दिन कैसे रखी जाती है सिक्योरिटी?

मतगणना के दिन कौन किस टेबल पर बैठा होगा, साथ ही उसकी नियुक्ति किस तरह की जाएगी. इस बात को लेकर मुद्दा इस बार सर्वोच्च अदालत पहुंच गया. लेकिन इस मुद्दे को लेकर निर्वाचन आयोग का मैन्युअल काफी साफ नियम बताता है.

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चुनावी मतगणना के दौरान काउंटिंग टेबल पर तैनात अधिकारियों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. यह मुद्दा इतना बड़ा है कि कई बार इसकी गूंज अदालतों, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुकी है. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि निर्वाचन आयोग के नियम और मैन्युअल इस पूरी प्रक्रिया को लेकर क्या कहते हैं.

हर विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम से वोटों की गिनती कराने के लिए एक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया जाता है. काउंटिंग टेबल पर चार सदस्यों की एक टीम तैनात रहती है, जो पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित करती है. इस टीम में एक मतगणना पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर), एक अतिरिक्त पर्यवेक्षक (काउंटिंग असिस्टेंट), एक माइक्रो ऑब्जर्वर और एक मल्टी टास्किंग स्टाफ  शामिल होता है. इनमें से कम से कम एक सदस्य केंद्र सरकार का कर्मचारी होना अनिवार्य होता है.

चयन प्रक्रिया कैसे तय होती है?
मतगणना पर्यवेक्षक आमतौर पर भारत सरकार का अधिकारी या उसके लेवल का होता है, जबकि अतिरिक्त पर्यवेक्षक समूह ‘बी’ स्तर का अधिकारी होता है. माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है. वहीं, एमटीएस कर्मचारी मशीनों और दस्तावेजों को संभालने सहित अन्य सहयोगी कार्यों में मदद करता है.

इन सभी अधिकारियों का चयन पहले से तय नहीं होता, बल्कि उन्हें पोलिंग अधिकारियों के पूल से पूरी तरह रैंडम आधार पर चुना जाता है. किस अधिकारी की ड्यूटी किस काउंटिंग टेबल पर लगेगी, यह आखिरी समय तक गोपनीय रखा जाता है. सभी कर्मचारियों को फोटो और क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र जारी किए जाते हैं.

सुरक्षा और निगरानी के कड़े इंतजाम
काउंटिंग सेंटर के भीतर सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम होते हैं. यहां तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है, जिसमें हर स्तर पर क्यूआर कोड स्कैनिंग के साथ-साथ मैन्युअल जांच और तलाशी भी शामिल होती है. काउंटिंग टेबल के चारों ओर सुरक्षा जाली लगाई जाती है, जिसके बाहर उम्मीदवारों के अधिकृत एजेंट मौजूद रहते हैं, ताकि वे पूरी प्रक्रिया पर नजर रख सकें.

मोबाइल फोन को काउंटिंग सेंटर के अंदर ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है. रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी होती है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह अधिकारी हो या एजेंट मोबाइल लेकर काउंटिंग टेबल तक न पहुंचे.

पहचान सत्यापन और अनुशासन के नियम
मतगणना शुरू होने से पहले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान ऐप आधारित डाटाबेस और उनके पहचान पत्र के जरिए सत्यापित की जाती है. इसकी लिखित पुष्टि भी अनिवार्य होती है. इसके अलावा, एक बार मतगणना शुरू होने के बाद कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या एजेंट बिना विशेष अनुमति के काउंटिंग स्थल को नहीं छोड़ सकता. केवल आपात स्थिति में ही बाहर जाने की अनुमति दी जाती है.