EAM Jaishankar urges Canada for responsible diplomacy amid rising tensions over Nijjar case
EAM Jaishankar urges Canada for responsible diplomacy amid rising tensions over Nijjar case
भारत और चीन के बीच एलएसी बॉर्डर (Line of Actual Control) पर सेना की तैनाती को लेकर समझौता हो गया है. जून 2020 में गलवान वैली में हुई मुठभेड़ के चार साल बाद दोनों देशों ने अपनी-अपनी सेनाओं को सीमा से वापस लेने का फैसला किया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस शांति समझौते के पीछे की वजह बता दी है.
कैसे मुमकिन हुआ चीन से समझौता?
जयशंकर ने इस समझौते को सफल बनाने में दो चीजों का योगदान बताया है. पहला, सीमा पर अड़े रहने का भारत का मजबूत संकल्प, और दूसरा बॉर्डर के बुनियादी ढांचे में हुआ महत्वपूर्ण सुधार. जयशंकर ने पुणे में एक यूनिवर्सिटी में छात्रों से बात करते हुए कहा, "हम आज जहां वहां अगर पहुंच सके हैं, तो इसके दो ही कारण हैं. पहला, है अपनी जमीन पर बने रहने और अपनी बात साबित करने का हमारा मजबूत प्रयास."
उन्होंने कहा, "यह तभी मुमकिन हो सका क्योंकि सेना वहां अकल्पनीय हालात में देश की रक्षा के लिए खड़ी थी. सेना ने अपना काम किया और कूटनीति ने अपना. इसके अलावा पिछले एक दशक में हमने अपने बुनियादी ढांचे में भी बहुत अहम सुधार किया है. एक दशक पहले जो संसाधन लगाए गए थे, उससे पांच गुणा ज्यादा सालाना रूप से लगाए जा रहे हैं. जब आप ऐसे प्रयास करते हैं तो नतीजे दिखते हैं. इसने हमारी सेना को तैनात रहने के लिए समर्थ बनाया है. मुझे लगता है कि इस सब के मिश्रण से ही हम जहां हैं वहां तक पहुंच सके हैं."
समझौते में हैं तीन अहम पहलू
इस दौरान विदेश मंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि चार साल के तनाव के बाद दोनों देशों के बीच भरोसा बनने में समय लगेगा. जयशंकर ने कहा, "2020 के बाद से सीमा पर स्थिति बहुत अशांत रही है और इसका समग्र संबंधों पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. सितंबर 2020 से हम चीनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं कि समाधान कैसे खोजा जाए."
उन्होंने कहा कि समझौते में तीन प्रमुख मुद्दों को संबोधित करना जरूरी है. पहला और सबसे जरूरी है दोनों देशों की सेनाओं का पीछे हटना. क्योंकि वे एक दूसरे के बेहद करीब आ गई थीं और कुछ भी होने की संभावना थी. दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है सरगर्मियों को कम करना और तीसरा बड़ा पहलू इस सवाल से जुड़ा है कि आप बॉर्डर को कैसे संभालें और सीमाओं पर समझौता कैसे करें.
जयशंकर ने कहा कि सरकारें अभी सेनाओं को पीछे हटाने पर ध्यान दे रही हैं, जो समझौते का पहला हिस्सा है. उन्होंने कहा, "हम पिछले दो सालों से इसी की कोशिश कर रहे थे. क्योंकि चार साल की अशांति के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास और एक-दूसरे के साथ काम करने की इच्छा पैदा होना लाज़मी है."
...जब 2020 में शुरू हुआ था भारत-चीन के बीच तनाव
भारत और चीन के बीच तनाव 2020 में पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन की सैन्य कार्रवाई के बाद शुरू हुआ था. गलवान घाटी में हुई घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था, जिसके कारण चार साल से भारत और चीन की सेनाएं एलएसी पर तैनात थीं. इस सप्ताह विदेश मंत्रालय ने एक अहम बयान जारी करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच एलएसी पर सेना की गश्त को लेकर समझौता हो गया है.
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2024) में भाग लिया. शिखर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक भी की. यह बैठक पांच सालों में दोनों नेताओं के बीच पहली औपचारिक बातचीत थी. जिनपिंग के साथ बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि दोनों देशों के बीच संबंध भारत और चीन के लोगों और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं.