फरीदकोट जेल के बंदियों ने बनाई देसी घी की पिन्नी और सजावटी दीये
फरीदकोट जेल के बंदियों ने बनाई देसी घी की पिन्नी और सजावटी दीये
पंजाब के फरीदकोट की केंद्रीय मॉडर्न जेल में बंदियों के हुनर और रचनात्मकता की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है. यहां बंद पुरुष और महिला बंदियों ने अपनी मेहनत से दिवाली के लिए कई तरह की सजावटी वस्तुएं और मिठाइयां तैयार की हैं. मोमबत्तियां, मिट्टी के दीये, गुलदस्ते और दूसरे सजावटी सामान के साथ बंदियों ने पिन्नी और बेसन की बर्फी भी बनाई है. खास बात यह है कि उनके हाथों से तैयार इन सामानों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. एक दिन में करीब एक लाख रुपये का सामान बिक चुका है, जिसे जेल प्रशासन अब तक की सबसे बड़ी बिक्री मान रहा है.
5 से 7 नवंबर तक लगाए गए विशेष स्टॉल
बंदियों के बनाए सामान की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए 5 से 7 नवंबर 2026 तक शहर में दो जगह स्टॉल लगाए गए हैं. ये स्टॉल हुक्की वाला चौक और जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर लगाए गए हैं. यहां पहुंचकर लोग मोमबत्तियां, मिट्टी के दीये, गुलदस्ते और अन्य हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं खरीद सकते हैं. इसके अलावा दिवाली के लिए तैयार पिन्नी और बेसन की बर्फी भी बिक्री के लिए रखी गई हैं. बंदियों ने लकड़ी का सामान भी बनाया है, जिसके लिए जेल में बची हुई वेस्ट लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है.
देसी घी और शक्कर से तैयार की मिठाइयां
इस पहल में मिठाइयों की गुणवत्ता और शुद्धता का भी ध्यान रखा गया है. जेल सुपरिटेंडेंट इकबाल सिंह के मुताबिक, बंदियों ने पिन्नी और बेसन की बर्फी देसी घी से तैयार की है. इनमें चीनी की जगह शक्कर का इस्तेमाल किया गया है. इस तरह बंदियों ने पारंपरिक मिठाइयां बनाने में भी अपनी कला दिखाई है.
जेल सुपरिटेंडेंट इकबाल सिंह ने बताया कि बंदियों ने सामान तैयार करने में काफी मेहनत और लगन दिखाई है. इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का मकसद उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और आर्थिक लाभ कमाने का मौका देना है. बिक्री से होने वाले मुनाफे का 40 प्रतिशत हिस्सा बंदियों को दिया जाएगा. उन्होंने शहर और जिले के लोगों से स्टॉल पर पहुंचकर सामान खरीदने की अपील भी की.
लोगों ने भी की बंदियों के हुनर की तारीफ
स्टॉल पर खरीदारी करने पहुंचे लोगों ने बंदियों के बनाए सामान और मिठाइयों की तारीफ की. उनका कहना है कि सामान अच्छी गुणवत्ता का और साफ-सुथरा है. इससे बंदियों को कमाई के साथ रोजगार का अवसर भी मिल रहा है. जेल प्रशासन की इस पहल को भी लोगों ने सराहा. यह कोशिश बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर दे रही है.
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