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12 जिलों को जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली आज रात से शुरू, जानें कार का कितना लगेगा खर्च, और हाईवे की खास विशेषता

उत्तर प्रदेश के विकास में एक मील का पत्थर साबित होने वाले गंगा एक्सप्रेसवे पर आज रात 12 बजे से टोल वसूली की प्रक्रिया शुरू हो रही है. 594 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड कॉरिडोर मेरठ से प्रयागराज के बीच 12 जिलों को जोड़ता है, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी.

गंगा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे
हाइलाइट्स
  • 30 अप्रैल को रात 12 बजे से शुरू होगी टोल वसूली

  • यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों को जोड़ता है

गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली आज रात 12 बजे से शुरू होने जा रही है. बातचीत के दौरान चीफ इंजीनियर यूपीडा राज चौधरी ने स्पष्ट किया कि इंटरचेंज और टोल प्लाजा पहले से निर्मित हैं. टोल दरें प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय की गई हैं और वाहन की एंट्री तथा एग्जिट पॉइंट के आधार पर फास्टैग से स्वतः कटौती होगी.

टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और ट्रैक्टर के लिए 1.28 रुपए प्रति किमी, कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहन के लिए 2.50 रुपए प्रति किमी, लाइट कमर्शियल वाहन, मिनी बस आदि के लिए 4.05 रुपए प्रति किमी, जबकि बस और ट्रक के लिए 8.20 रुपए प्रति किमी तय किया गया है. वहीं मल्टीएक्सल, भारी मशीनरी और अर्थमूविंग वाहनों के लिए 12.60 रुपए प्रति किमी तथा ओवरसाइज वाहनों के लिए 16.10 रुपए प्रति किमी दर निर्धारित की गई है. प्रयागराज से मेरठ तक कार से यात्रा करने पर करीब 1500 रुपए टोल लगने का अनुमान है. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि कंसेशनर चाहे तो शुरुआती दिनों में कुछ छूट भी दी जा सकती है, जैसा पहले अन्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में किया गया था.

उत्तर प्रदेश के विकास में ऐतिहासिक कदम
बुधवार को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया गया, जो मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर है. यह परियोजना न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, कृषि विपणन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी गेमचेंजर साबित होगी.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से सीधे जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी मजबूती प्रदान करेगा.

12 जिलों को सीधी कनेक्टिविटी, यात्रा समय में बड़ी कमी
प्रधानमंत्री जिस गंगा एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दिखा चुके हैं, वह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है. इस हाई-स्पीड मार्ग के चालू होने से इन क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी. जहां पहले लंबी दूरी तय करने में कई घंटे लगते थे, अब यह सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा. इसके साथ ही माल परिवहन की लागत में कमी आने से उद्योगों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी.

पीपीपी मॉडल पर तैयार, 120 किमी प्रति घंटे की स्पीड
गंगा एक्सप्रेसवे को पीपीपी (DBFOT) मॉडल पर विकसित किया गया है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसे फिलहाल 6 लेन में तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8 लेन तक विस्तार योग्य बनाया गया है.

120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ यह एक्सप्रेसवे तेज और सुगम यातायात सुनिश्चित करेगा. उच्च गुणवत्ता के निर्माण, चौड़े राइट ऑफ वे और मजबूत सेफ्टी फीचर्स इसे देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे में शामिल करते हैं.

एयरस्ट्रिप, आईटीएमएस और अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था
इस एक्सप्रेसवे की एक खास विशेषता शाहजहांपुर के पास बनाई गई लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप है, जहां आपात स्थिति में वायुसेना के विमान उतर सकते हैं.

इसके अलावा, पूरे मार्ग पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है. वाहनों की गति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा.

 

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