Farmer
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भावनगर ज़िले के घोघा तालुका में नागाधनिबा गांव के पास खेत रखने वाले किसान जगदीशभाई खासिया ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करके अपनी आर्थिक स्थिति बदल ली है. ज़िले में 30 से ज़्यादा किसान अभी ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं. बागवानी की यह फ़सल, जो सामान्य फ़सलों से ज़्यादा आमदनी देती है, कई किसानों को आकर्षित कर रही है. किसान जगदीशभाई के मामले में इस खेती का सीधा असर उनके बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है. किसान चाहे दिन-रात कितनी भी मेहनत करे, अगर उसे सही फायदा न मिले, तो उसकी मेहनत बेकार चली जाती है. कृषि प्रधान देश में खेती के तरीके भी बदल रहे हैं. ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों की आर्थिक स्थिति बदल रही है. भावनगर जिले के जगदीशभाई को भी ड्रैगन फ्रूट की खेती से अपने बच्चों की शिक्षा में सीधी मदद मिली है.
पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई बागवानी
आमतौर पर राज्य में कपास, मूंगफली और बाजरा जैसी फसलें उगाई जाती हैं, लेकिन अब किसान धीरे-धीरे बागवानी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि उनसे अच्छी आमदनी हो रही है. आइए इस बारे में बात करते हैं. भावनगर जिले के भाडी गांव के किसान सामान्य फसलों को छोड़कर पिछले पांच सालों से ड्रैगन फ्रूट की बागवानी फसल से लाखों रुपये कमा रहे हैं. इसका सीधा असर उनके बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है. आइए इस किसान से मिलते हैं. भावनगर जिले के घोघा तालुका में नागाधनिबा गांव के पास खेत रखने वाले जगदीशभाई खासिया पिछले पांच सालों से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं.
जगदीशभाई खासिया ने कहा, 'मैं पिछले पांच सालों से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहा हूं. उससे पहले मैं कपास, बाजरा और मूंगफली की खेती करता था, जिसमें कड़ी मेहनत के बावजूद कोई खास मुनाफा नहीं होता था. लेकिन पिछले पांच सालों से ड्रैगन फ्रूट की खेती से मुझे काफी आर्थिक लाभ हुआ है. एक बीघा जमीन से मुझे दो लाख रुपये की कमाई होती है, जिसमें से एक से डेढ़ लाख रुपये का मुनाफा बचता है.' नागाधनिबा गांव में खेत रखने वाले किसान जगदीशभाई मूल रूप से भाडी गांव के रहने वाले हैं. फिलहाल वे अपनी कुल जमीन में से सिर्फ़ सात बीघा जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती करते हैं.
जैविक खेती से हो रहा बेहतर मुनाफा
जगदीशभाई ने कहा, 'मैं जैविक खेती करता हूं, यानी बिना कीटनाशक वाली खेती. मैं DAP, खाद या दवाइयों का इस्तेमाल नहीं करता. खेती में गाय के गोबर का इस्तेमाल करता हूं. मेरे पास 25 बीघा जमीन है, जिसमें से पिछले पांच सालों से मैंने सिर्फ सात बीघा जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया है. रात के समय ड्रैगन फ्रूट के पौधों पर बल्ब लगाए जाते हैं, ताकि उन्हें रोशनी मिले और पैदावार अच्छी हो. बाकी जमीन पर मैं कपास और बाजरा भी उगाता हूं. परिवार में हम दो भाई हैं.' जगदीशभाई के बेटे कुलदीप ने कहा, 'मैं 12वीं की पढ़ाई पूरी करके डीजल मैकेनिकल का कोर्स करना चाहता हूं. मेरे पिता ड्रैगन फ्रूट की खेती करते हैं और हम भी उसमें मदद करते हैं.'
जिले में बढ़ रही ड्रैगन फ्रूट की खेती
दूसरी ओर, भावनगर जिले में बागवानी के बारे में अधिकारी एम.बी. वाघमशी ने बताया कि भावनगर जिले के अलग-अलग तालुकाओं में लगभग 25 से 30 किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती करते हैं. लाल ड्रैगन फ्रूट की मांग सबसे ज़्यादा है, इसलिए इसकी खेती ज्यादा होती है. तलाजा के लिलीवाव गांव में पीले ड्रैगन फ्रूट की खेती भी की जाती है. जिले में अनुमानित 45 हेक्टेयर जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती होती है. सरकार ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए हर साल 3.50 लाख रुपये की सहायता देती है, हालांकि शुरुआती लागत लगभग 7 लाख रुपये आती है. उसके बाद ड्रैगन फ्रूट की खेती में कोई और खर्च नहीं होता. किसानों को इस खेती से अच्छा मुनाफा भी मिलता है.
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