जस्टिस गौतम चौधरी
जस्टिस गौतम चौधरी
हिंदी दिवस के अवसर पर देशभर में हिंदी के प्रचार-प्रसार और इसे बढ़ावा देने के लिए तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. हिंदी के सम्मान की बातें होती हैं और इसे जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जाता है. लेकिन प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने हिंदी को सिर्फ भाषणों और आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय न्याय के क्षेत्र में उसे व्यावहारिक रूप से स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किया है.
आज के दौर में अंग्रेजी को आधुनिकता, रोजगार और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है. नई पीढ़ी में अंग्रेजी के प्रति आकर्षण भी लगातार बढ़ रहा है. ऐसे समय में जस्टिस गौतम चौधरी ने न्याय व्यवस्था में हिंदी के इस्तेमाल और आम आदमी को उसकी अपनी भाषा में न्याय समझाने की जरूरत पर जोर दिया है.
जस्टिस गौतम चौधरी की पहचान न्याय के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर तो है ही, साथ ही हिंदी में न्यायिक आदेश और निर्णय लिखने के उनके प्रयासों ने उन्हें अलग पहचान दी है. उनके द्वारा अब तक कुल 96,657 ऑर्डर/जजमेंट दिए जाने की जानकारी है. जिनमें हिंदी में दिए गए आदेशों और निर्णयों की संख्या 38 हजार से अधिक पहुंच चुकी है.
हिंदी में आदेश और निर्णय लिखने का यह सिलसिला लगातार जारी है. उनके हिंदी में दिए गए आदेशों की संख्या अब तक किसी हाईकोर्ट के न्यायाधीश द्वारा हिंदी में दिए गए आदेशों की तुलना में काफी अधिक बताई जाती है.
जस्टिस गौतम चौधरी का मानना है कि अंग्रेजी दुनिया से संपर्क स्थापित करने और दुनिया को समझने का माध्यम हो सकती है, लेकिन भारत को समझने के लिए हिंदी और भारतीय भाषाओं को समझना जरूरी है. उनके अनुसार जिस व्यक्ति को हिंदी समझ में नहीं आती, वह भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक नब्ज को पूरी तरह नहीं समझ सकता.
उनका कहना है कि उन्हें अंग्रेजी भाषा से कोई राग-द्वेष नहीं है. अंग्रेजी सीखना और जानना जरूरी है, लेकिन केवल अंग्रेजी जान लेने से कोई व्यक्ति विद्वान नहीं हो जाता. हिंदी को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है.
जस्टिस चौधरी भाषा के स्तर पर आत्मनिर्भरता की जरूरत पर भी जोर देते हैं. उनका मानना है कि भारत भौगोलिक और सम्मानजनक रूप से स्वतंत्र हो चुका है, लेकिन भाषा के स्तर पर अभी भी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता. उन्होंने हिंदी को रोजगारपरक बनाए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया है.
जस्टिस गौतम चौधरी के मुताबिक हिंदी को रोजगार से जोड़ने के पर्याप्त प्रयास नहीं हुए हैं. हिंदी को मजबूत बनाने के लिए इसे शिक्षा, प्रशासन, न्याय और रोजगार के क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदी में न्यायिक आदेश और निर्णय लिखने को लेकर उनका कहना है कि यह पहल उनके लिए कोई नई बात नहीं है. उनसे पहले भी न्यायमूर्ति प्रेम शंकर, न्यायमूर्ति बीएल यादव और न्यायमूर्ति आरबी मेहरोत्रा सहित कई न्यायाधीशों ने हिंदी में लिखा और हिंदी को प्रोत्साहित किया.