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Amravati News: इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा खरीदने पर, पौधा मिल रहा बिल्कुल मुफ्त... गणेश उत्सव के साथ पर्यावरण बचाने का संदेश

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव जोरों से तैयारी में है. इसी बीच अमरावती का ऐसा भी एक विक्रेता है, जो गणेश जी की प्रतिमा के साथ पौधा भी मुफ्त दे रहा है. वह इसे एक पहल के तहत कर रहा है. जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैले.

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बप्पा प्रतिमा के साथ पौधा घर ले जाते लोग बप्पा प्रतिमा के साथ पौधा घर ले जाते लोग

गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरे महाराष्ट्र में जोर-शोर से चल रही हैं. बाजारों में तरह-तरह की गणेश प्रतिमाएं सज चुकी हैं. लेकिन अमरावती में गणपति उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली एक अनोखी पहल लोगों का ध्यान खींच रही है. यहां पर्यावरण प्रेमी और मूर्ति कलाकार नीलेश कंचनपुर ने मिट्टी से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं के साथ लोगों को एक खूबसूरत तोहफा देने की शुरुआत की है. उनकी दुकान से गणपति बप्पा की पर्यावरण पूरक प्रतिमा खरीदने वाले भक्तों को एक गमले के साथ पौधा निशुल्क भेंट किया जा रहा है.

बप्पा के साथ भक्तों को मिल रहा पौधा भी

अमरावती के इस गणपति बाजार में बप्पा की अलग-अलग प्रतिमाएं भक्तों को आकर्षित कर रही हैं. लेकिन इन प्रतिमाओं के बीच पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती ये मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं खास हैं. पर्यावरण प्रेमी और मूर्ति कलाकार नीलेश कंचनपुर ने गणेश उत्सव को सिर्फ पूजा और उत्सव तक सीमित न रखते हुए इसे प्रकृति से जोड़ने की कोशिश की है. उनकी दुकान पर इको-फ्रेंडली मिट्टी की गणेश प्रतिमा खरीदने वाले भक्तों को एक गमले के साथ पौधा भी निशुल्क दिया जा रहा है.

बप्पा के साथ हर घर पहुंचे हरियाली

इस पहल के तहत जिस घर में विराजेंगे गणपति बप्पा, तो उनके साथ घर आएगा हरियाली का एक नया साथी. गणेश प्रतिमा की स्थापना के साथ पौधे की देखभाल करने का यह संदेश भक्तों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिला रहा है.

नीलेश कंचनपुर की इस पहल को गणेश भक्तों और पर्यावरण प्रेमियों की भी सराहना मिल रही है. उनका मकसद है कि गणेश उत्सव के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोग पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमाओं को अपनाएं और अपने घर-आंगन में हरियाली बढ़ाएं.

गणपति बप्पा की प्रतिमा के साथ जब घर में एक पौधा भी पहुंचेगा, तो यह सिर्फ गणेश उत्सव नहीं बल्कि प्रकृति के संरक्षण का भी उत्सव बन जाएगा. अमरावती में नीलेश कंचनपुर की यह पहल इसी खूबसूरत सोच को आगे बढ़ा रही है.