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Parliament Cost: एक मिनट के 2.5 लाख और घंटे के 1.5 करोड़, एक दिन की कार्यवाही का आंकड़ा उड़ा देगा आपके होश

आपने कभी सोचा है कि संसद की एक दिन की कार्यवाही पर देश का कितना पैसा खर्च होता है? विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, संसद के हर मिनट की कीमत लगभग 2.5 लाख रुपये है, यानी एक घंटे में करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

Prime Minister Narendra Modi Prime Minister Narendra Modi

Parliament Special Session Cost: देश की राजनीति का सबसे बड़ा मंच संसद है, जहां देश से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होती है. सरकार से सवाल पूछे जाते हैं और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर मुहर लगती है. संसद का हर सत्र सिर्फ राजनीतिक तौर पर ही नहीं, खर्च के लिहाज से भी काफी बड़ा होता है. मानसून सत्र शुरू होते ही एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर संसद की एक दिन की कार्यवाही पर कितना खर्च आता है.

16 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ विशेष सत्र
16 से 18 अप्रैल 2026 से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. इस सत्र में महिला आरक्षण बिल एक प्रमुख एजेंडा है. लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए प्रस्तावित आरक्षण को 2029 लोकसभा चुनाव से लागू करना है. इसके लिए लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन अहम विधेयकों को पारित कराने पर सर्वसम्मति बनाने की तैयारी की गई है, ताकि व्यवस्था समय पर लागू हो सके.

एक मिनट में 2.5 लाख रुपये का होता है खर्च
रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद की कार्यवाही पर हर मिनट लगभग 2 लाख 50 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जाता है. इसी हिसाब से देखें तो एक घंटे का खर्च करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. अगर सदन की कार्यवाही पूरे दिन सुचारु रूप से चलती है, तो यह आंकड़ा करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि इस खर्च को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन विभिन्न रिपोर्ट्स में यही अनुमान सामने आता है.

किन चीजों पर होता है इतना खर्च
संसद सत्र के दौरान खर्च सिर्फ सांसदों की मौजूदगी तक सीमित नहीं होता. इसमें संसद भवन की बिजली, पानी, एयर कंडीशनिंग, रख-रखाव और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर भी बड़ा खर्च आता है. इसके अलावा CCTV कैमरे, तकनीकी उपकरण, लाइव टेलिकास्ट सिस्टम और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसी बजट का हिस्सा होते हैं. संसद की सुरक्षा के लिए CRPF और दिल्ली पुलिस की तैनाती रहती है, जिसका खर्च भी इसमें शामिल माना जाता है.

सैलरी, भत्ता और अन्य सुविधाएं भी शामिल
सत्र के दौरान सांसदों को मिलने वाला डेली अलाउंस, कर्मचारियों की सैलरी, ईंधन, खान-पान और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी बड़ी रकम खर्च होती है. सदन की कार्यवाही को देशभर के लोगों तक पहुंचाने के लिए लाइव प्रसारण और डिजिटल सिस्टम लगातार काम करते हैं, जिस पर भी रोजाना करोड़ों रुपये का खर्च आता है.

अगर सदन में हंगामे की वजह से कार्यवाही बार-बार स्थगित होती है या दिनभर कामकाज प्रभावित रहता है, तो इससे सार्वजनिक धन का बड़ा नुकसान होता है. यही वजह है कि संसद का हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

 

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