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Delhi Pollution Control Tips: दिल्ली में खतरनाक स्तर पर पहुंचने लगी प्रदूषित हवा, अभी से अपना लें ये 6 आदतें, सुरक्षित रहेगा स्वास्थ्य

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और खराब AQI से बचने के लिए अभी से सावधानी बरतना जरूरी है. दिल्ली में हर साल प्रदूषण खतरे के निशान तक पहुंच जाता है. ऐसे में अगर आप ये कुछ आदतें अपनाते हैं तो आपके सेहत को फायदा मिलेगा.

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दिल्ली में सर्दियां आने से पहले ही हवा की गुणवत्ता चिंता बढ़ाने लगती है. हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे बारीक कण सांस के साथ शरीर में पहुंच सकते हैं. खासकर PM2.5 इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं. लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में सिर्फ प्रदूषण बढ़ने के बाद सावधानी बरतना काफी नहीं है. रोजमर्रा की कुछ आदतें अभी से बदलकर आप प्रदूषित हवा के संपर्क को कम कर सकते हैं.

N95 मास्क का ही इस्तेमाल करें
काम के कारण तो आपको बाहर निकलना ही पड़ेगा, तो इसके लिए फिटिंग वाला N95 मास्क पहनना फायदेमंद हो सकता है. यह हवा में मौजूद कई बारीक कणों के संपर्क को कम करता है, बशर्ते मास्क नाक और मुंह पर अच्छी तरह फिट हो. ढीला मास्क, रुमाल या साधारण कपड़ा बारीक प्रदूषक कणों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता. मास्क इस्तेमाल करते समय उसके निर्देशों का पालन करें. 

AQI पर बनाए रखें नजर
घर से बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) देखना शुरू करें. इससे आपको पता चलेगा कि हवा कितनी प्रदूषित है और बाहर निकलने से पहले कितनी सावधानी रखने की जरूरत है. AQI खराब होने पर बेवजह बाहर जाने से बचें और जरूरी कामों को एक ही बार में पूरा करने की कोशिश करें. ध्यान रखें कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है. 

बाहर एक्सरसाइज करने से बचें
सुबह की सैर या खुले में दौड़ना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन प्रदूषण बढ़ने पर यही आदत नुकसान पहुंचा सकती है. एक्सरसाइज करते समय सांस तेज चलती है, जिससे ज्यादा प्रदूषित हवा शरीर में जा सकती है. इसलिए AQI खराब होने पर बाहर दौड़ने, जॉगिंग और भारी एक्सरसाइज से बचें. इसके बजाय घर के अंदर हल्की एक्सरसाइज कर सकते हैं.

घर की हवा को साफ रखें
यह जरूरी नहीं कि घर के अंदर की हवा बाहर से साफ हो. खिड़कियों और दरवाजों से प्रदूषक कण अंदर आ सकते हैं. जब बाहर प्रदूषण ज्यादा हो, तब खिड़कियां बंद रखें. अगर संभव हो तो कमरे के आकार के हिसाब से सही क्षमता वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें. उसके फिल्टर को समय पर साफ करना या बदलना भी जरूरी है. ओजोन पैदा करने वाले एयर प्यूरीफायर से बचें, क्योंकि इससे घर के अंदर का प्रदूषण बढ़ सकता है. 

धूल और धुएं से दूरी बनाएं
सड़क पर भारी ट्रैफिक, निर्माण स्थलों और धूल उड़ने वाली जगहों के आसपास प्रदूषकों का संपर्क ज्यादा हो सकता है. इसलिए कोशिश करें कि ऐसी जगहों पर लंबे समय तक न रुकें. घर में कूड़ा, सूखे पत्ते या लकड़ी जलाने से भी बचें. बंद कमरे में अगरबत्ती और मच्छर भगाने वाली कॉइल का ज्यादा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इनसे भी हवा में प्रदूषक बढ़ सकते हैं. 

धूम्रपान से बचें 
प्रदूषण के बीच सिगरेट या बीड़ी पीने से सांस की नलियों और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इसलिए धूम्रपान से बचें और घर के अंदर भी किसी को धूम्रपान न करने दें. अगर आंखों में जलन, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या सीने में भारीपन महसूस हो, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें. गंभीर या अचानक बढ़ती सांस की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें.
 

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