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हेल्थवेल्थ समिट में बोले जेपी नड्डा- देशभर में 1.86 करोड़ आयुष्मान आरोग्य मंदिर बने, 2047 तक विकसित भारत बनाना है तो देश को स्वस्थ रखना होगा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा समावेशी और व्यापक बनाने की दिशा में बदलाव हुआ. सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को जरूरत के समय बेहतर इलाज मिले और आर्थिक परेशानी के कारण किसी को स्वास्थ्य सेवाओं से दूर न रहना पड़े.

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JP Nadda focused on strengthening India's health infrastructure at HealthWealth Summit. (Credits: India Today) JP Nadda focused on strengthening India's health infrastructure at HealthWealth Summit. (Credits: India Today)

साल 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकेगा, जब देश की आबादी स्वस्थ होगी. सिर्फ बीमार होने पर इलाज मिलना काफी नहीं है, बल्कि लोगों को बीमारी से बचाने, समय पर जांच कराने और गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की भी जरूरत है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को इंडिया टुडे के पहले हेल्थवेल्थ समिट का उद्घाटन करते हुए यह बात कही. उन्होंने बताया कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है. इसमें अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं का विस्तार, इलाज का खर्च कम करना, स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाना और तकनीक का इस्तेमाल शामिल है.

इलाज के साथ बीमारी से बचाव पर भी जोर
जेपी नड्डा ने कहा कि पहले देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का ज्यादा ध्यान बीमारी होने के बाद इलाज करने पर रहता था. लेकिन अब स्वास्थ्य को व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत है. इसमें बीमारी से बचाव, समय पर जांच और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना भी शामिल है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा समावेशी और व्यापक बनाने की दिशा में बदलाव हुआ. सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को जरूरत के समय बेहतर इलाज मिले और आर्थिक परेशानी के कारण किसी को स्वास्थ्य सेवाओं से दूर न रहना पड़े.

देश में 1.86 करोड़ आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि देशभर में 1.86 करोड़ आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं. इन केंद्रों का उद्देश्य लोगों को उनके आसपास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि छोटी-मोटी बीमारियों की जांच और सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें. इन केंद्रों पर कुल 12 तरह की सेवाओं के पैकेज दिए जाते हैं. इनमें महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और बच्चों की देखभाल से जुड़ी सेवाएं भी शामिल हैं. इसके साथ ही बीमारियों की शुरुआती पहचान और बचाव पर जोर दिया जाता है.

बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण पर फोकस
नड्डा ने मिशन इंद्रधनुष का भी जिक्र किया. इस अभियान का उद्देश्य उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाना है, जो नियमित टीकाकरण से छूट जाते हैं. समय पर टीके लगने से बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है. सरकार की कोशिश है कि टीकाकरण का दायरा बढ़े और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों को भी इसका लाभ मिले.

बड़े अस्पतालों के साथ स्थानीय स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करना जरूरी
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में एम्स जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को भी बेहतर बनाना जरूरी है. कई मरीज अपने आसपास के अस्पतालों में इलाज कराने के बजाय सीधे बड़े संस्थानों का रुख करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों. इससे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है.

विकसित भारत के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में निवेश जरूरी
नड्डा ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, चिकित्सा तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं के वित्तपोषण पर ध्यान देना होगा. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं न केवल लोगों का जीवन आसान बनाती हैं, बल्कि देश की उत्पादकता और आर्थिक विकास में भी योगदान देती हैं.

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