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Defence self reliance: रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग, हथियार उत्पादन में हासिल किया चौथा स्थान

सैन्य मोर्चे पर भारत का स्वदेशी मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस आत्मनिर्भर मिशन का असर अब दिखने लगा है. भारत की गिनती अब बड़े हथियार उत्पादकों में होने लगी है. SIPRI की रिपोर्ट में ये कहा गया है कि भारत एशिया पैसिफिक देशों में हथियार उत्पादन में चौथे नंबर पर है. इस खबर से आत्मनिर्भर भारत योजना की सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.

रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग
हाइलाइट्स
  • 300 सामानों का विदेश आयात प्रतिबंधित

  • 42 देशों में निर्यात हो रहे हथियार

रक्षा क्षेत्र में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में इसकी पुष्टि कर दी है. रिपोर्ट में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के मामले में हिंदुस्तान को एशिया-पैसिफिक रीजन में चौथा स्थान दिया गया है, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है.

रिपोर्ट में पहले नंबर पर चीन
SIPRI ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में एशिया-पैसिफिक रीजन से 12 देशों को शामिल किया है. जिसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, पाकिस्तान, सिंगापुर, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं. इस रिपोर्ट में चीन को पहला स्थान, जबकि जापान को दूसरा स्थान और दक्षिण कोरिया को तीसरा स्थान दिया गया है. SIPRI ने जो रिपोर्ट जारी की है. वो 2016 से 2020 तक के डेटा के आधार पर तैयार की गई है. जबकि भारत ने आत्मनिर्भरता के मामले में पिछले दो से तीन साल में ही शानदार प्रगति की है. ऐसे में चौथे स्थान पर काबिज भारत भविष्य में होने वाले दूसरे अध्ययन में और बढ़त बना सकता है.

300 सामानों का विदेश आयात प्रतिबंधित
भारत सरकार ने भी सेना में आत्मनिर्भर भारत योजना को बढ़ावा देने के लिए थल सेना, वायुसेना और नौसेना में कम से कम 300 ऐसे सामानों के विदेश से आयात को प्रतिबंधित किया है. जो भारत में ही बन सकते हैं. भारत में प्राइवेट सेक्टर को स्पेशल डिफेंस कॉरिडोर बनाकर प्रोत्साहित किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित डिफेंस कॉरिडोर में प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां हथियार और सैन्य तकनीक का निर्माण करेंगी.

हथियार ही नहीं अब अत्याधुनिक टैंक भी देश में बन रहे
भारत ने थल सेना के लिए हथियार बनाना तो काफी पहले ही शुरु कर दिया था. लेकिन नौसेना और वायुसेना के लिए भी अब देश में ही फाइटर जेट्स, फाइटर हेलीकॉप्टर, वॉरशिप, सबमरीन बनाए जाने लगे हैं. थल सेना के लिए राइफल और ड्रेस से लेकर अत्याधुनिक टैंक तक देश में ही बनाए जा रहे हैं. अगर मिसाइलों की बात करें तो आकाश, नाग, अग्नि और पृथ्वी जैसे कई स्वदेशी मिसाइल दुश्मन का काम तमाम करने के लिए काफी है. वायुसेना में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस ने जो मुकाम हासिल किया है. उसका जवाब कई देशों के पास नहीं है. स्वदेशी प्रचंड हेलीकॉप्टर भी अपनी गर्जना से दुश्मनों के कैंप में थरथराहट पैदा कर रहा है. जबकि नौसेना के तरकश में शामिल कई स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां अपनी जांबाजी साबित कर रहे हैं.

42 देशों में निर्यात हो रहे हथियार
भारत सरकार ने हाल ही में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कई दूरगामी कदम उठाए हैं. लेकिन उससे पहले ही भारत अपनी सेना के लिए कई हथियारों का निर्माण करता रहा है. यही नहीं आज हिंदुस्तान कई हथियारों के मामले में सिर्फ अपनी जरूरतें ही पूरी नहीं कर रहा बल्कि करीब 42 देशों को हथियारों का निर्यात भी कर रहा है. जिसमें कई बड़े देश भी शामिल हैं. कतर, लेबनान, इराक, इक्वाडोर और जापान, जैसे देशों को भारत बॉडी प्रोटेक्टिंग उपकरण निर्यात कर रहा है. तो फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात करने का सौदा हो चुका है. मलेशिया ने 18 विमानों का ऑर्डर दिया है. इसके अलावा अर्जेंटीना, इजिप्ट और फिलीपींस भी तेजस विमान खरीदने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं. यही नहीं भारत को मिसाइल, रॉकेट और गोला-बारूद के लिए आर्मेनिया से 245 मिलियन डॉलर का ऑर्डर मिला है. सरकारी रक्षा कंपनियों को वित्तीय वर्ष 2023 तक अपने कुल राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा निर्यात के जरिए प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. 

17 हजार करोड़ की सामग्री का निर्यात
भारत फिलहाल सालाना करीब 17000 करोड़ रुपये की रक्षा सामग्री का निर्यात कर रहा है. केंद्र सरकार ने अगले 4 साल में रक्षा निर्यात को दोगुना से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा है. यही नहीं साल 2030 तक रक्षा उद्योग में भारत को बड़ा प्लेयर बनकर उभरने का प्लान सरकार ने बनाया है.