
ऑस्ट्रेलियन एंडरसन के वायरल वीडियो का सच
ऑस्ट्रेलियन एंडरसन के वायरल वीडियो का सच
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ महीनों से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में दावा किया गया कि ईंट भट्ठे पर काम कर रहा युवक ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला है. पोस्ट में लिखा गया कि उसका नाम एंडरसन (Andresan) है और भारत में ताजमहल घूमने के दौरान उसका पासपोर्ट और वॉलेट चोरी हो गया, जिसके बाद वह मजबूरी में ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर रहा है. लोग यह तक अपील करने लगे कि भले इसका वॉलेट रख लो पर प्लीज जरूरी डॉक्यूमेंट लौटा दो. हालांकि एंडरसन की यह कहानी इतनी तेजी से फैली कि हजारों लोगों ने इसे सच मान लिया. लेकिन सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती. इस युवक से बात करने पर ये पूरा दावा झूठा साबित हो गया.
वायरल वीडियो की कहानी निकली अधूरी
जिस युवक को सोशल मीडिया पर 'ऑस्ट्रेलियन एंडरसन' बताया जा रहा है, वह कोई विदेशी नागरिक नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का रहने वाला भारतीय युवक है. उनका असली नाम साहिल है. सोशल मीडिया पर जो कहानी सुनाई गई, उसका सच उससे बिल्कुल अलग निकला. साहिल ने बातचीत में बताया कि उनका रंग-रूप बचपन से ही ऐसा है. इसी वजह से लोग उसे देखकर अकसर विदेशी समझ लेते हैं. लेकिन उनका जन्म और परवरिश भारत में ही हुई है.
बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठाने लगे साहिल
साहिल ने बताया कि वह करीब 15-16 साल की उम्र से ईंट भट्ठे पर काम कर रहा है. इसकी वजह उन्होंने एक घटना को बताई. उनके पिता के साथ एक हादसा हो गया था, जिसमें उनका एक हाथ खराब हो गया. हादसे के बाद उनके घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. ऐसे समय में साहिल ने पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा परिवार की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी और ईंट भट्ठे में काम करना शुरू कर दिया. आज उनकी उम्र करीब 21-22 साल है. परिवार में उसकी मां हैं, दो बड़े भाई हैं और अपने घर में साहिल सबसे छोटे है. बड़े भाई की शादी हो चुकी है और उनकी एक बेटी भी है. परिवार के दूसरे सदस्य भी ईंट भट्ठे पर काम करके घर चलाते हैं.

एक वीडियो ने बदल दी जिंदगी
साहिल ने बताया कि जिस दिन वीडियो बनाया गया, उस दिन वह हमेशा की तरह ईंटें उठा रहे थे. तभी भट्ठे के मुंशी ने बिना बताए उनका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया. साहिल को उस समय इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह छोटी-सी रिकॉर्डिंग आगे चलकर लाखों लोगों तक पहुंच जाएगी. बाद में मुंशी ने उसी वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया. वीडियो के साथ लिखा गया कि यह युवक ऑस्ट्रेलिया से आया है, उसका नाम एंडरसन है. इसका पासपोर्ट और वॉलेट आगरा में चोरी होने के कारण ये ईंट भट्ठे पर काम करने को मजबूर है.
लोग दूतावास से मदद की मांग करने लगे
वीडियो देखते-देखते इतना वायरल हो गया कि लोगों ने उसे सच मान लिया. कई सोशल मीडिया यूजर्स भारत में बने ऑस्ट्रेलियाई दूतावास से इस युवक की मदद करने और उसे वापस भेजने की मांग करने लगे. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि जिस युवक को विदेशी बताया जा रहा था, उसे खुद इस वायरल वीडियो की जानकारी नहीं थी. जब साहिल को इस पूरे मामले का पता चला तो वह भी हैरान रह गए. क्योंकि वह न तो ऑस्ट्रेलिया से आया था और न ही उसका कोई पासपोर्ट चोरी हुआ था. वह तो बागपत के रहने वाले एक आम भारतीय नागरिक है, जो अपने परिवार के साथ मेहनत-मजदूरी करके जीवन चला रहे हैं.
परिवार में सिर्फ साहिल का रंग-रूप अलग
साहिल ने बताया कि उनके पूरे परिवार में सिर्फ वही ऐसे दिखते है, जिसकी वजह से लोग उसे विदेशी समझ लेते हैं. यही कारण बना कि सोशल मीडिया पर उसके बारे में मनगढ़ंत कहानी बना दी गई और लाखों लोगों ने बिना जांचे उसे सच मान लिया.
अब ऑस्ट्रेलिया जाने का सपना
सोशल मीडिया पर 'इंडियन एंडरसन' के नाम से पहचान मिलने के बाद साहिल की जिंदगी में एक नई इच्छा भी जन्मी है. उन्होंने बताया कि अब उनका सपना सच में ऑस्ट्रेलिया जाने का है. वह मुस्कुराते हुए कहते है कि लोगों ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया का नाम देकर एक नई पहचान दी है, इसलिए अब वह एक दिन सच में वहां जाना चाहते हैं. हालांकि, फिलहाल उनकी दुनिया आज भी उसी ईंट भट्ठे के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां वह अपने भाइयों के साथ मेहनत करके परिवार का सहारा बने हुए हैं.
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